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22 सितम्बर, 2020|7:54|IST

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मांगल गीतों के साथ शिव-पार्वती की मूर्ति विसर्जित

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मांगल गीतों के साथ शिव-पार्वती की मूर्ति का विसर्जन कर गमरा पर्व का समापन किया गया। तीन दिनों तक चले उत्सव में शिव-पार्वती के विवाह की रस्म निभाई गई।

कुमाऊं का यह उत्सव पहाड़ों में हर घर, गांव में परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इसी लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए गांव से पलायन कर रुड़की में बसे लोग पिछले 11 से शिवाजी कॉलोनी में गमरा पर्व मना रहे हैं। मान्यता के अनुसार भाद्रपद मास में सांतू आंठू का लोक पर्व पर तीन दिनों तक कार्यक्रम होता है। शिव-पार्वती के विवाह की रस्म निभाई गई। बुधवार को गमरा पर्व के समापन पर शिवाजी कॉलोनी से श्रद्धालु शिव-पार्वती की मूर्ति लेकर गंगनहर किनारे घाट पर पहुंचे।

गमरा संयोजक नंदा ऐरी, देव सिंह सावंत और महादेव पांडे ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। पंडित जयदत्त जोशी ने महामृत्युंजय का पाठ कराया। इसके बाद हर्षोउल्लास से मांगल गीत गाती महिलाएं शिव पार्वती की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए पहुंची।

इस दौरान रेखा जोशी, रोशन पांडे, हरीश पांडे, दीपक त्रिपाठी, शीला बिष्ट, भगवान सिंह गिरी, रमेश कांडपाल, गोविंद सिंह ,इंदर सिंह बिष्ट, अनिल जोशी, गोविंद भट्ट, मदन मोहन जोशी, गीता पुजारा, तुलसी पांडे, बिंदु मेहता, मीना, पार्वती रावत, बसंती, विजय सिंह पंवार, जीवानंद बुडाकोटी, सतीश नेगी, गिरीश भट्ट, राजेंद्र सिंह रावत आदि भक्त मौजूद रहे।

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  • Web Title:Immerse the idol of Shiva-Parvati with Mangal songs