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भातरीय ज्ञान परंपरा में है ज्ञान, विज्ञान, धर्म और कर्म का समन्वय

श्रीदेव सुमन विवि परिसर ऋषिकेश में भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र की दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी मंगलवार को शुरू हुई, जिसमें विभिन्न विवि के 228...

भातरीय ज्ञान परंपरा में है ज्ञान, विज्ञान, धर्म और कर्म का समन्वय
हिन्दुस्तान टीम,रिषिकेषTue, 11 Jun 2024 06:00 PM
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श्रीदेव सुमन विवि परिसर ऋषिकेश में भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र की दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी मंगलवार को शुरू हुई, जिसमें विभिन्न विवि के 228 छात्र-छात्राओं ने शिरकत की। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान और विज्ञान, लौकिक और पारलौकिक दृष्टि, धर्म एवं कर्म का विलक्षण समन्वय है।
मंगलवार को आधुनिक परिदृश्य में भारतीय प्राच्य ज्ञान सम्पदा विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ कुलपति प्रो. एनके जोशी ने किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के केंद्रीय आधार के रूप में शामिल किया गया है। यदि शिक्षा का तात्पर्य मनुष्य को जीवनयापन में सफल बनाना है, तो आज तक शिक्षा के क्षेत्र में हमने विलक्षण प्रगति की है, लेकिन शिक्षा का उद्देश्य जीवन को सार्थक करना है और भारतीय पुरातन ज्ञान इसी धारणा पर अवलंबित है। गढ़वाल एवं कुमांऊ विवि के पूर्व कुलपति प्रो. वीएस राजपूत ने कहा कि प्राचीन भारतीयों द्वारा अविष्कृत विचारों और आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिक का मूल आधार को दृढ़ करने में अभूतपूर्व योगदान रहा है। परिसर के निदेशक प्रो. महाबीर सिंह रावत ने कहा कि मनुष्य को कैसे कर्म करने चाहिए इसका उल्लेख उपनिषदों से प्राप्त होता है। प्राचीन वेदों और अन्य शास्त्रों में चिकित्सा प्रणाली का उल्लेख किया गया है। चरक साहित्या और सुश्रूत साहित्या जड़ी बूटियों के साहित्य के मुख्य परम्पारिक संग्रह है। मौक पर प्रो. अनिता तोमर, प्रो. कल्पना पंत, प्रो. पूनम पाठक, डा. डीके श्रीवास्तव, प्रो. प्रतिभा शुक्ला, प्रो. नालिन भट्ट, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. ओमप्रकाश, डा. जितेन्द्र कुमार, डा. अशोक कुमार, डा. तेजेन्द्र कुमार गुप्ता, प्रो. वाईके शर्मा, विज्ञान संकाय अध्यक्ष प्रो. गुलशन कुमार ढ़िंगरा, कला संकाल अध्यक्ष प्रो. डीसी गोस्वामी, वाणिज्य संकाय अध्यक्ष प्रो. कंचन लता सिन्हा, प्रो. संगीता मिश्रा, प्रो. मनोज यादव, प्रो. एसपी सती, डा. शिखा ममगांई, प्रो. डीकेपी चौधरी, प्रो. हेमन्त शुक्ला, प्रो. अटल बिहारी त्रिपाठी, प्रो. एमडी त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

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