शीतलहर के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त

Jan 08, 2026 05:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रिषिकेष
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ऋषिकेश और आस-पास के क्षेत्रों में शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित किया है। ठंड के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक और ई-रिक्शा चालक अधिक प्रभावित हुए हैं। नगर निगम ने अलाव की व्यवस्था की है, लेकिन यह अपर्याप्त साबित हो रही है।

शीतलहर के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त
तीर्थनगरी ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में बीते कई दिनों से जारी शीतलहर ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं के चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। खासकर सुबह और शाम के समय ठिठुरन बढ़ने से बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। लगातार गिरते तापमान के कारण ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर देखने को मिल रहा है। शीतलहर से दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक, ई-रिक्शा चालक और ठेले-फड़ पर निर्भर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ठंड के कारण काम के घंटे घटने से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। कई मजदूर अलाव के सहारे दिन गुजारने को मजबूर हैं। गुरुवार को शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पर लोग ठंड से बचाव के लिए अलाव तापते नजर आए।

राज्य मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने बताया कि फिलहाल शीतलहर की स्थिति बनी रहने की संभावना है। गुरुवार को ऋषिकेश का अधिकतम तापमान 16 डिग्री और न्यूनतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। नगर निगम द्वारा शहर के एक दर्जन सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन 40 वार्डों वाले शहर के लिए यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। स्थानीय लोग जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण की मांग उठा रहे हैं। वहीं नववर्ष के बाद पर्यटकों की संख्या में आई गिरावट से पर्यटन व राफ्टिंग कारोबार से जुड़े लोग भी मायूस नजर आ रहे हैं।

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