भारतीय ज्ञान परम्परा हमारी बौद्धिक धरोहर: कुलपति प्रो. एनके जोशी
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान ने भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'भारत बौद्धिक्स' परीक्षा का आयोजन किया। श्रीदेव सुमन विवि के 300 छात्रों ने भाग लिया। प्रथम और द्वितीय स्थान पर आने वालों को क्रमशः एक लाख और 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। सभी प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान ने भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शनिवार को “भारत बौद्धिक्स” राष्ट्रीय परीक्षा का आयोजन किया। जिसमें श्रीदेव सुमन विवि परिसर के 300 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को एक लाख, द्वितीय को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। विवि के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा कि “भारतीय ज्ञान परम्परा हमारी सभ्यता की अमूल्य बौद्धिक धरोहर है। इस प्रकार की परीक्षाएं विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित करने का अवसर प्रदान करती हैं। परिसर निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि हमारे परिसर के 300 विद्यार्थियों ने इस राष्ट्रीय परीक्षा में भाग लेकर यह सिद्ध किया है कि युवा पीढ़ी भारतीय ज्ञान परम्परा को समझने और अपनाने के लिए तत्पर है।
परीक्षा प्रभारी प्रो. धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि परीक्षा अत्यंत सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। परीक्षा के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने बताया कि परीक्षा में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। साथ ही प्रथम स्थान पाने वाले को एक लाख, द्वितीय स्थान पाने वाले को पचास हजार, तृतीय स्थान पाने वाले को 25000, अन्य कई लोगों को सांत्वना पुरस्कार 2,500 रुपये की राशि दी जाएगी। मौके पर विद्या भारती प्रतिनिधि के रूप में सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य उमाकान्त पंत, प्रो. सुरमान आर्य, नरेन्द्र खुराना, रामगोपाल रतूड़ी आदि उपस्थित रहे।

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