
राष्ट्रीय शिक्षा नीति से भारत बनेगा वैश्विक ज्ञान महाशक्ति:राणा
ऋषिकेश के पुष्पा बडेरा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि डॉ. जगमोहन सिंह राणा ने कहा कि यह नीति भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाएगी। संगोष्ठी में विभिन्न शिक्षाविदों ने नई नीति के लाभ और छात्रों के कौशल विकास पर विचार व्यक्त किए।
ढालवाला स्थित पुष्पा बडेरा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश में गुरुवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड लोक सेवा आयोग डॉ. जगमोहन सिंह राणा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है, जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित हो। नई शिक्षा नीति से जहां शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं छात्र-छात्राओं के कौशल का विकास भी संभव है। संगोष्ठी का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि यूसर्क की पूर्व निदेशक डॉ. अनीता रावत, अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य विजय बडोनी ने किया।
डॉ. अनीता रावत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति गुणवत्ता और जवाबदेही के मार्गदर्शी सिद्धांतों पर कार्य करती है। डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति का लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और तकनीकी एकीकरण को बढ़ावा देना है। विद्यालय के प्रधानाचार्य विजय बडोनी ने कहा कि नई नीति में शिक्षा की संरचना में परिवर्तन करते हुए छात्र की बुनियादी शिक्षा मात्रृभाषा में प्रदान की जाएगी। शिक्षक विनोद बिजल्वाण ने कहा कि उच्च शिक्षा में सुधार करते हुए एक ही संस्थान में सभी विषयों का अध्ययन किया जाएगा और छात्रों को विषय परिवर्तन की आजादी प्रदान की जाएगी। शिक्षाविद विशालमणि पैन्यूली ने कहा कि छात्र की रचनात्मक सोच और आलोचनात्मक सोच इन कौशलों का विकास होगा। मौके पर शिक्षक रामकृष्ण पोखरियाल, भगतराम बिजल्वान, विनोद द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत राज्य छात्रों को भाषा चुनने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। ताकि किसी भी भाषा को छात्र पर थोप ना जाए और लचीलापन बना रहे। शिक्षक सुशील बडोनी ने कहा कि छात्र को प्रेरक वातावरण प्रदान करते हुए खेल आधारित, गतिविधि आधारित, खोज आधारित शिक्षा से जोड़ा जाए। छात्र रटने की बजाय रचनात्मक सोच से सीखें। डॉ. नंद किशोर गौड ने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में छात्र को सोचने और समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। ताकि वह भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। शिक्षक भगवान सिंह रांगड ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार छात्र की उम्र ,क्षमताओं और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाएगी। शिक्षाविद अलख नारायण दुबे ने नई शिक्षा नीति पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि मूल्यांकन छात्र परीक्षा तक सीमित न होकर छात्र के ज्ञान कौशल और क्षमताओं का व्यापक आकलन हो सके।

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