साधकों को उपनिषदों के ज्ञान से रूबरू कराया
तीन दिवसीय अद्वैत महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधकों को उपनिषदों के ज्ञान और महिमा से रूबरू कराया गया। महोत्सव में अमेरिका एवं यूरोप...
ऋषिकेश। संवाददाता
तीन दिवसीय अद्वैत महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधकों को उपनिषदों के ज्ञान और महिमा से रूबरू कराया गया। महोत्सव में अमेरिका एवं यूरोप के जिज्ञासु साधक ऑनलाइन जुड़े और चर्चा की।
स्वर्गाश्रम स्थित वेद निकेतन आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय अद्वैत महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को आचार्य प्रशांत ने गीता के सत्रह रूपों और उपनिषदों के साठ रूपों की शिक्षा दी। उन्होंने बताया कि तपोवन के आगे ब्रह्मपुरी, शिवपुरी, फूलचट्टी इत्यादि गंगा तट गहन वेदान्त चचाओं का केंद्र रहे हैं। इन चर्चाओं के पीछे छुपी हैं अनेक कहानियां, अनेक रोचक किस्से और कई ऐसे जीवन जिन्हें इन चर्चाओं ने बदल ही डाला। महोत्सव में विदेशों से भी जिज्ञासु साधक आनलाइन जुड़े और अध्यात्म आदि विषयों पर चर्चा की।
आयोजक साक्षी उनियाल ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य जन-जन का उपनिषदों के ज्ञान एवं महिमा से परिचय कराना है। अद्वैत महोत्सव के तीन दिनों में विभिन्न प्रांतों से आए साधकों ने उपनिषद, अपरोक्षानुभूति, विवेकचूड़ामणि जैसे ग्रन्थों के गूढ़ रहस्य को जाना।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




