लेखक दिवस पर बाल रचनाकारों को नवाजा
अंतर्राष्ट्रीय लेखक दिवस पर थानो में आयोजित समारोह में 65 से अधिक देशों के साहित्यकार जुड़े। वरिष्ठ लेखकों को 'लेखक सम्मान' दिया गया। पद्मश्री कल्याण सिंह ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। लेखक गांव को सृजनात्मकता का केंद्र बताते हुए रचनाशीलता को बढ़ावा देने की घोषणा की गई।

अंतर्राष्ट्रीय लेखक दिवस के अवसर पर मंगलवार को लेखक गांव थानो में आयोजित समारोह में भारत सहित विश्व के 65 से अधिक देशों के साहित्यकार एक मंच से जुड़े। इस दौरान वरिष्ठ लेखकों तथा विभिन्न देशों से ऑनलाइन जुड़े हिंदी एवं प्रवासी हिंदी साहित्यकारों को ‘लेखक सम्मान’ प्रदान किया गया। थानो स्थित लेख गांव में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह ‘मैती’ ने कहा कि लेखक गांव विश्व पटल पर साहित्य की एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने का सार्थक कार्य कर रहा है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक है कि साहित्य समाज को मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति जागृत करे।
लेखक गांव इसी सृजनशील संकल्प के साथ साहित्य और समाज के मध्य एक सशक्त सेतु के रूप में उभर रहा है, जो शब्द की शक्ति के माध्यम से विश्व में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में प्रेरक पहल कर रहा है। लेखक गांव के संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कहा कि लेखक समाज का सजग द्रष्टा, चिंतक और संवेदना का सेतु होता है। उन्होंने घोषणा की कि रचनाशील लेखकों को लेखक गांव सशक्त मंच प्रदान करेगा। उनकी सृजनशीलता को गति देने के साथ ही उनके साहित्य को लेखक गांव प्रशासन के तहत प्रकाशित भी किया जाएगा। इसके लिए निकट भविष्य में कार्यशालाएं, संवाद सत्र एवं प्रकाशन योजनाएं प्रारंभ की जाएंगी। लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि लेखक गांव केवल एक स्थान नहीं, बल्कि सृजनात्मक चेतना का केंद्र है, जहां शब्दों के माध्यम से संस्कृति और संस्कारों का संवर्धन होता है। कार्यक्रम का ऑनलाइन संचालन जर्मनी से अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी समन्वयक डॉ. शिप्रा शिल्पी ने किया, जबकि ऑफलाइन संचालन डॉ. बेचैन कंडियाल एवं शिवम ढौंढियाल ने संयुक्त रूप से किया। अंत में संयोजक पूजा पोखरियाल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। मौके पर डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. नीरजा शर्मा, सचिन राणा, बालकृष्ण चमोली, अनिल जोशी, तापस चक्रवर्ती, आदित्य वत्स, वीरेन्द्र डंगवाल ‘पार्थ’, नरेन्द्र उनियाल ‘ननु’, डॉ. मनोरमा नौटियाल, नीलम पांडेय ‘नील’, भारती डिमरी, संगीता राणा, मुकेश राणा, संतोष आशीष, डॉ. शशि देवली, डॉ. सौम्यता पांडे, डॉ. रितेश चौधरी, डॉ. सीमा परवीन, डॉ. जागेश्वर सिंह, डॉ. शोभा चौधरी, डॉ. अल्फीशा, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, हिमालय विरासत ट्रस्ट की अध्यक्ष आशना नेगी आदि साहित्यकार एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
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