जनजातीय संस्कृति भारतीय जीवन दर्शन की आत्मा:डॉ राजकुमारी भण्डारी

जनजातीय संस्कृति भारतीय जीवन दर्शन की आत्मा:डॉ राजकुमारी भण्डारी

संक्षेप:

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि परिसर में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं परम्परा विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. राजकुमारी भंडारी ने जनजातीय समाज और भारतीय संस्कृति पर जोर दिया। उन्होंने सामूहिक परिवार प्रणाली की महत्ता बताई। कार्यक्रम में प्रमुख समाजसेवी और अन्य शिक्षाविदों ने भी विचार साझा किए।

Nov 12, 2025 07:55 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रिषिकेष
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श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि परिसर ऋषिकेश में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं परम्परा विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकपत्थर की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमारी भंडारी ने कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन और सशक्त धारा है। बुधवार को बीसीए विभाग एवं भारतीय ज्ञान परम्परा उत्कृष्टता केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं परम्परा विषयक व्याख्यानमाला के अंतर्गत तृतीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकपत्थर की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमारी भंडारी ने भारतीय संस्कृति में जनजातीय एवं पारम्परिक ज्ञान का महत्त्व विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनजातीय समुदायों में सामूहिक परिवार प्रणाली आज भी जीवंत है, जो भारतीय सामाजिक दर्शन की वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का वास्तविक रूप है।

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उन्होंने बताया कि जनजातीय जीवन में परिवार केवल एक इकाई नहीं, बल्कि सामूहिक उत्तरदायित्व और सामाजिक एकता का केंद्र होता है। इस प्रणाली में सभी सदस्य परस्पर सहयोग, श्रम-विभाजन और संसाधनों के साझा उपयोग की परंपरा को निभाते हैं, जिससे सामुदायिक जीवन में आत्मनिर्भरता और सौहार्द बना रहता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी भारत सिंह चौहान ने कहा कि प्रत्येक जनजाति भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की कला में निपुण है और आधुनिक समाज को उनसे सीखने की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति और परम्परा के अध्ययन में रुचि लें, क्योंकि यही भविष्य की संतुलित और नैतिक शिक्षा प्रणाली की नींव है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो एसपी सती ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली को शैक्षिक ढांचे में पुनर्स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल आधुनिक विज्ञान की दिशा में नहीं, बल्कि पारंपरिक मूल्यों और स्थानीय ज्ञान के संरक्षण की दिशा में भी अग्रसर होनी चाहिए। कार्यक्रम संयोजक एवं बीसीए समन्वयक डॉ गौरव वार्ष्णेय ने कहा कि इस व्याख्यानमाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान प्रणाली, संस्कृति और विज्ञान के पारस्परिक संबंधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परम्परा उत्कृष्टता केन्द्र की निदेशक प्रो कल्पना पन्त, उपनिदेशक प्रो पूनम पाठक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो हेमलता मिश्रा, एवं इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो संगीता मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में शिखा वार्ष्णेय, मोनिका काला, कविता, संजय तिवारी, राहुल सुयाल सहित बीसीए विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।