
विश्व को श्रेष्ठ बनाने के लिए हिंदू धर्म को जाने:ईश्वरदास महाराज
रविवार को इंदिरानगर ऋषिकेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास ने सनातन धर्म की विशेषताओं पर जोर दिया। वक्ताओं ने परिवार, संस्कृति, और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर चर्चा की। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सोमवार को इंदिरानगर ऋषिकेश में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि विश्व को श्रेष्ठ बनाने के लिए हिंदू धर्म की विशेषताएं जाननी जरूरी हैं। इंदिरानगर में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म अति प्राचीन धर्म है, जिसे हिंदू धर्म भी कहा जाता है। सनातन का अर्थ है जिसका न आदि है न अंत। यह सत्य, कर्म, मोक्ष और आचरण की श्रेष्ठता पर आधारित जीवन पद्धति है। कहा हर परिवार को रामायण, गीता, सत्यार्थ प्रकाश आदि धार्मिक पुस्तकें पढ़नी चाहिए।
मुख्य वक्ता राकेश ने कहा कि संघ ने शताब्दी वर्ष पर पंच परिवर्तन को हिंदुओं के बीच पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक सरसरता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और नागरिक कर्तव्य शामिल है। उन्होंने स्थानीय परंपराओं, बोली, भाषा, त्योहार, संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। डॉ. अनुराधा ने कहा कि परिवार से ही हमारी पहचान है। यदि परिवार नहीं रहेगा तो एक दिन हम भी नहीं रहेंगे। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। मौके पर संयोजक डॉ. शशि कंडवाल, सह संयोजक राजेश भट्ट आदि मौजूद रहे।

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