
प्रकृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता जरूरी: डॉ. रमेश पोखरियाल
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज ने हिमालय दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने हिमालय की महत्ता और संरक्षण पर चर्चा की। पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने जल और...
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को हिमालय दिवस पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने मानव जीवन में हिमालय की महत्ता के बारे में बताया। इस दौरान सभी ने हिमालय संरक्षण का संकल्प भी लिया। मंगलवार को डोईवाला स्थित हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ पर्यावरणविद् एवं पाणी राखो अभियान के प्रणेता सच्चिदानंद भारती ने किया। उन्होंने कहा कि आज देश का प्रत्येक हिस्सा जल और जंगल के संकट से जूझ रहा है, जिसमें उत्तराखंड भी शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में हमने 1000 वर्ग किमी के जंगल विकास की अंधी दौड़ में समाप्त कर दिये है, जिससे हिमालय की पारिस्थिकी और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और आज हम धराली जैसी मानव निर्मित आपदाओं का सामना कर रहें है।

हमारे इसी अनियोजित विकास के कारण वर्ष 2013 में हमने केदारनाथ आपदा का सामना किया था। आज हिमालय के संरक्षण के लिए एक विशेष अलग नीति की अति आवश्यकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृखंला नहीं भारत की आत्मा है। हिमालय त्याग और तपस्या का प्रतीक है। हिमालय सुरक्षित रहेगा तो भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा। विवि के कुलपति प्रो. रजवार ने हिमालय की आजीविका विषय एवं प्रतिकुलपति प्रो. राकेश सुन्दरियाल ने हिमालय राज्यों में जैव विविधता से रोजगार विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम नाटिका, पारम्परिक नृत्यों एवं योग प्रदर्शन की प्रस्तुतियां दी। सभी ने हिमालय संरक्षण का संकल्प किया। मौके पर विवि के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार, सचिव बालकृष्ण चमोली, कुलसचिव अरविन्द अरोड़ा, आयुर्वेद कालेज प्राचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव, नर्सिंग कॉलेज प्राचार्य डॉ. अंजना विलियम्स, डॉ. निशान्त राय जैन, संयुक्त परिसर निदेशक डॉ. प्रदीप कोठियाल आदि उपस्थित रहे।

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