चंद्रग्रहण के चलते मंदिरों के कपाट रहे बंद
फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर मंगलवार को साल का पहला चंद्रग्रहण लगा। सूतक काल के कारण तीर्थनगरी के मंदिर शाम साढ़े छह बजे तक बंद रहे। चंद्रग्रहण का समय दोपहर 3:27 से शाम 6:57 बजे तक रहा। गंगा आरती भी डेढ़ घंटे देर से हुई।

फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगा। चंद्रग्रहण के सूतक काल के चलते दिनभर तीर्थनगरी के मंदिरों के कपाट शाम साढ़े छह बजे तक बंद रहे। रात्रि में मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रमुख घाटों पर गंगा आरती की गई। चंद्रग्रहण दोपहर 3:27 बजे से शाम 6:57 बजे तक रहा। चंद्रग्रहण का सूतक कई घंटे पहले ही शुरू हो गया था, जिसकी वजह से ऋषिकेश में चंद्रेश्वर मंदिर, वीरभद्र महादेव मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर, दून मार्ग स्थित दुर्गा मंदिर, त्रिवेणी घाट स्थित रघुनाथ मंदिर समेत तमाम मंदिरों के कपाट सुबह से लगभग सात बजे शाम तक बंद रहे।
ग्रहण समापन के बाद मंदिरों को धोया गया और फिर वहां पूजा-अर्चना की गई। तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि ग्रहण काल को शास्त्रों में 'सूतक' का समय कहा गया है। सूतक वह अवधि है जब पूजा-अर्चना, भोग लगाना, मूर्ति स्पर्श और अन्य बाह्य धार्मिक कर्म वर्जित हो जाते हैं। चंद्र ग्रहण में सूतक नौ घंटे पहले और सूर्य ग्रहण में बारह घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों में नियमित पूजा स्थगित कर दी जाती है और कपाट बंद कर दिए जाते हैं। डेढ़ घंटे देर से हुई गंगा आरती त्रिवेणी घाट पर प्रत्येक दिन शाम छह से गंगा आरती शुरू हो जाती है। लेकिन मंगलवार को चंद्रग्रहण के चलते गंगा आरती के समय में बदलाव किया गया। सात बजे चंद्रग्रहण समापन हुआ और इसके बाद करीब साढ़े सात बजे बाद यहां गंगा आरती की गई। श्री गंगा सभा के उपाध्यक्ष महंत रामकृपाल दास ने बताया कि चंद्रग्रहण के सूतक काल के चलते गंगा आरती देरी से की गई।
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