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प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करें श्रद्धालु: नौटियाल

प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करें श्रद्धालु: नौटियाल

कथा मर्मज्ञ शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रीकृष्ण ने संर्पूण जीवन में प्रकृति, पशुधन सुरक्षा व पौष्टिक खान पान आदि का संदेश दिया। हमें भी इसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए और प्रकृतिक के संरक्षण के लिए कार्य करना चाहिए।

रविवार को तपोवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास पंडित शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि यूं तो भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन ही लोक शिक्षाओं से भरा है। उनकी अनेक लीलाएं मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण शिक्षाएं देती हैं। चाहे कालियदमन लीला हो या गोवर्धन लीला, गोचारण हो या फिर माखन लीला। इन सब में कहीं न कहीं प्रकृति के संरक्षण, पशुधन सुरक्षा और पौष्टिक खान-पान का संदेश दिया गया है। कहा कि प्राचीन काल से ही भगवान व ऋषि मुनि पर्यावरण व प्रकृति के संरक्षण का संदेश देते आए हैं। वर्तमान में हमें इसके महत्व को समझना होगा। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण संकल्प का दिलाया। मौके पर पदम भंडारी, एमएस भंडारी, ज्योति भंडारी, बीना भंडारी, सुधा नेगी, राजेश्वरी रावत, शीला चौहान, मोनिका, विमला नेगी, कमला रांगड़, मिथिलेश जमोली, पूनम राणा, लक्ष्मी बहुगुणा, शशि भट्ट, मीना कुलियाल, विजय लक्ष्मी नौटियाल, पूर्ण सिंह चौहान, गोपाल चौहान, जगत सिंह नेगी, प्रमोद चमोली, सदर नेगी, भूपेंद्र रावत, पीएस भंडारी, त्रिलोक भंडारी, जगमोहन पयाल, वीरेंद्र कैंतुरा, सुरवीर चौहान, टेक सिंह चौहान, विनोद जुगलाण, आचार्य वंशी कोठियाल, मनोज थपलियाल, नीरज शुक्ला, खुशीराम उनियाल, ऋषि कोठियाल, प्रवेश उनियाल, पुरषोत्तम कोठारी आदि उपस्थित थे।

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  • Web Title:Devotees should work to conserve nature Nautiyal