
ऋषिकेश हिंसा के दो मास्टरमाइंड, भीड़ को भड़काकर बवाल कराया; पत्थरबाजों की तस्वीरें जारी
Rishikesh Violence: ऋषिकेश वनभूमि में सर्वे के विरोध में भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने खुलासा किया है कि इस हिंसा के पीछे दो मास्टरमाइंड थे। जिन्होंने भीड़ को भड़काकर बवाल कराया। पत्थरबाजों की तस्वीरें जारी।
Rishikesh Violence: ऋषिकेश में वनभूमि के सर्वे के विरोध में हाईवे जाम और पत्थरबाजी के मामलों में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। पत्थरबाजी मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। अलग-अलग तीन प्रकरणों में पुलिस ने कुल 1058 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें 28 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 1030 अज्ञात महिला-पुरुषों को आरोपी बनाया गया है। घटनाओं के चलते नेशनल हाईवे, रेलवे ट्रैक और आपात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। पथराव के पीछे दो मास्टरमाइंड सामने आए हैं। जिला पंचायत सदस्य समेत 222 आरोपी बनाए गए हैं।
पुलिस के भीड़ को हटाने के दौरान सीताराम राणाकोटी और लालमणि रतूड़ी ने फिर से भीड़ को भड़काकर साजिश के तहत रेलवे ट्रैक जाम किया। इससे छह ट्रेनों का आवागमन बाधित हो गया। रेलवे ट्रैक पर पड़े पत्थरों से जान से मारने की नीयत से पथराव किया। अफरा-तफरी में पुलिसकर्मी और जाम में फंसे लोगों की जान पर बन आई। बताया कि भीड़ से जहांगीर आलम और गंगा प्रसाद सिमल्टी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 500 से 600 अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
बवाल के पीछे दो मास्टरमाइंड
मनसा देवी रेलवे फाटक पर पत्थरबाजी में सीताराम रणाकोटी और लालमणि रतूड़ी पर साजिश का आरोप है। पुलिस ने सिर्फ इन दो लोगों को ही नहीं, बल्कि अन्य 16 लोगों को भी पत्थरबाजी मामले में मुख्य आरोपी बताया है। प्रकरण में 618 लोगों के खिलाफ बीएनएस की दस धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा भी शामिल है। मामले में सीताराम और लालमणि के अलावा छह लोग नामजद भी हैं, जिनमें से दो लोगों को पुलिस बीते रविवार को ही घटनास्थल से हिरासत में ले चुकी है।

भीड़ ने पुलिस को पत्थर फेंक भगाया
पत्थरबाजी प्रकरण में ऋषिकेश पुलिस की यह कार्रवाई कोतवाल कैलास चंद्र भट्ट की शिकायत पर की गई है। उन्होंने तहरीर में बताया कि वनभूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस सुरक्षा में तैनात थी। 28 दिसंबर को श्यामपुर में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध हुआ। आक्रोशित लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाया गया। आरोप है कि आक्रोशित भीड़ की अगुवाई कर रहे सीताराम रणाकोटी, लालमणि रतूड़ी, योगेश डिमरी उर्फ आंवला न्यूज, विकास सेमवाल, जहांगीर आलम, गंगा प्रसाद सिमल्टी, पूजा पोखरियाल, राजेंद्र गैरोला और दस अज्ञात महिला-पुरुषों ने लगातार भीड़ को उकसाया। रोड और रेलवे ट्रैक जाम करने के लिए भड़काते हुए फेसबुक लाइव में भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की, जिससे भीड़ उग्र होकर नारेबाजी करते हुए न सिर्फ मरने-मारने पर उतारू हुई, बल्कि आक्रोशित लोग अभद्रता करते हुए हाईवे और मनसा देवी में रेलवे ट्रैक पर ही बैठ गए। कोतवाल ने बताया कि इससे लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ।

पुलिस ने जारी कीं पत्थरबाजों की तस्वीरें
प्रशासन, पुलिस, आरपीएफ, जीआरपी और वन विभाग के कर्मचारियों पर पत्थरबाजी को लेकर ऋषिकेश पुलिस ने पत्थरबाजों के वीडियो और फोटो जारी कर दिए हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पुलिस फोटो और वीडियो को प्रसारित कर रही है। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि जारी वीडियो और फोटो में हाथ में पत्थर लिए लोग कहीं भी दिखें, तो वह इसकी सूचना ऋषिकेश कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को सरकारी नंबर पर दे सकते हैं।
निर्दोष लोगों पर हो रहा अत्याचार : गोदियाल
ऋषिकेश। कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल सोमवार को बापूग्राम क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने यहां स्थानीय लोगों से मुलाकात की। सभा कर उन्हें कांग्रेस के हरवक्त साथ होने का भरोसा दिया। कहा कि सरकार लोगों की मदद की बजाय उन्हें डराने का काम कर रही है। इसे अत्याचार बताते हुए उन्होंने निर्दोष लोगों को जेल भेजने का भी आरोप लगाया।

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