चयन प्रक्रिया के बाद आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Feb 27, 2026 03:54 pm ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नैनीताल, भाषा
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा नहीं करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ से वंचित किए जाने की शिकायत नहीं कर सकता।  

चयन प्रक्रिया के बाद आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा नहीं करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ से वंचित किए जाने की शिकायत नहीं कर सकता। जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की सिंगल-जज बेंच ने साइंस स्ट्रीम में असिस्टेंट टीचर (प्राइमरी) के पद के लिए सिलेक्शन प्रोसेस को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को दिए गए क्षैतिज आरक्षण के तहत की गई नियुक्ति में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ने असिस्टेंट टीचर (प्राइमरी) के पद के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। उसने दलील दी कि विज्ञान विषय में चंपावत जिले के लिए चयनित उम्मीदवार को उससे कम अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्त कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने की थी चयन सूची रद्द करने की मांग

याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता ने 28 जनवरी, 2026 को प्रकाशित चयन सूची को रद्द करने, प्रतिवादी की नियुक्ति को निरस्त करने और उसे उसकी योग्यता के आधार पर नियुक्त करने का निर्देश देने की प्रार्थना की थी।

‘चयनित उम्मीदवार ने राज्य आंदोलनकारी योजना का लाभ उठाया था’

राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि चयनित उम्मीदवार ने राज्य आंदोलनकारी योजना का लाभ उठाया था। इस प्रावधान के तहत उत्तराखंड राज्य के आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राज्य सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाता है, जिसके अंतर्गत नियुक्ति की गई थी। भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सरकारी आदेशों के अनुसार क्षैतिज आरक्षण लागू होगा।

लाभ का दावा नहीं किया था : याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्वयं राज्य आंदोलनकारी श्रेणी से संबंधित है, लेकिन उसने चयन प्रक्रिया के दौरान इस लाभ का दावा नहीं किया था।

अदालत ने फैसला सुनाया कि संबंधित स्तर पर आरक्षण का दावा किए बिना कोई उम्मीदवार इसका लाभ नहीं मिलने की शिकायत बाद में नहीं कर सकता है। उसने आगे कहा कि चूंकि प्रतिवादी को एक अलग आरक्षित श्रेणी के तहत नियुक्त किया गया था, इसलिए उसकी योग्यता की तुलना सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार की योग्यता से नहीं की जा सकती।

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

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