रेयर अर्थ की खोज, बायो फार्मा हब और पीएम आवास तक, बजट से उत्तराखंड को क्या-क्या सौगातें

Feb 02, 2026 08:01 am ISTGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून
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Budget 2026: बजट 2026 उत्तराखंड के लिए कई सौगातें लेकर आया है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान से लेकर, रेयर अर्थ की संभावना, बायो फार्मा हब और पहाड़ों में पीएम आवास योजना तक बहुत कुछ है। 

रेयर अर्थ की खोज, बायो फार्मा हब और पीएम आवास तक, बजट से उत्तराखंड को क्या-क्या सौगातें

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 उत्तराखंड के लिए कई मायनों में खास है। आपदा-संवेदनशील और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस हिमालयी राज्य को बजट में स्वास्थ्य, आवास, फार्मा उद्योग और खनिज संसाधनों के मोर्चे पर बड़ी राहत और संभावनाएं मिली हैं। खासकर हर जिले में ट्रामा सेंटर खोलने की घोषणा का सबसे अधिक लाभ उत्तराखंड जैसे राज्य को मिलने की उम्मीद है, जहां हर साल प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं।

उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में आपात चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी रही है। दुर्घटना या आपदा के बाद अधिकतर घायलों को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जिससे कीमती समय नष्ट हो जाता है। ऐसे में यदि हर जिले में आधुनिक ट्रामा सेंटर स्थापित होते हैं, तो आपदा और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित इलाज मिल सकेगा। इसका लाभ चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलेगा, क्योंकि यात्रा सीजन में हादसों की संख्या बढ़ जाती है। फिलहाल राज्य में ट्रामा सेंटर मुख्य रूप से मेडिकल कॉलेजों तक सीमित हैं।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान

उत्तराखंड को जल्द अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की सौगात मिल सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की है। जिससे उत्तराखंड में इस संस्थान के खुलने की संभावना और बढ़ गई है।

जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने पर जोर

बजट में जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने का भी ऐलान किया गया है। पर्वतीय जिलों में जहां संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता, वहां इस फैसले से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव होगा। वहीं मैदानी जिलों में जिला अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है, जिसे कम करने में यह कदम अहम साबित हो सकता है।

इलाज, जांच और शोध के लिए नए मेडिकल हब

केंद्रीय बजट में निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित करने की योजना भी शामिल है। इन हब में इलाज के साथ-साथ डायग्नोस्टिक और शोध की एकीकृत सुविधा विकसित की जाएगी। देहरादून जैसे शहरों में ऐसे संस्थान स्थापित होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों (Allied Health Professionals) की संख्या बढ़ाने का फैसला भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देगा।

बायो फार्मा हब से दवा उद्योग को बढ़ावा

बजट में बायो-फार्मा हब बनाने की घोषणा का विशेष लाभ उत्तराखंड जैसे दवा उत्पादक राज्य को मिल सकता है। राज्य में वर्तमान में 300 से अधिक दवा निर्माण इकाइयां हैं और देश के कुल दवा उत्पादन में उत्तराखंड की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। सालाना लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का दवा बाजार होने के कारण नई योजना से सस्ती और गुणवत्ता-परख दवाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

कैंसर, शुगर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की दवाएं सस्ती करने की दिशा में यह योजना अहम मानी जा रही है। उत्तराखंड की दवा इकाइयां देश के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात करती हैं और कई कंपनियों के पास यूएसएफडीए जैसे अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस मौजूद हैं।

पहाड़ों में पीएम आवास योजना को रफ्तार

बजट 2026 से प्रधानमंत्री आवास योजना को भी नई गति मिली है। उत्तराखंड में योजना अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। पहले चरण में स्वीकृत करीब 64,391 आवासों में से 34 हजार से अधिक घर पूरे हो चुके हैं। बजट में शहरी और ग्रामीण आवास के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष सहायता पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक देश में दो करोड़ नए घर बनाना है, जिसका सीधा लाभ उत्तराखंड के मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को मिलेगा।

रेयर अर्थ धातुओं की खोज

केंद्रीय बजट में रेयर अर्थ धातुओं की खोज को प्रोत्साहन देने की घोषणा उत्तराखंड के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। वैज्ञानिक अध्ययनों और हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों में दुर्लभ मृदा धातुओं की मौजूदगी की संभावना है। चमोली, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग की चट्टानी संरचनाओं में कार्बोनाइट और पेगमाटाइट के साथ रेयर अर्थ तत्वों के अंश मिले हैं, जबकि उत्तरकाशी के कुछ हिस्सों में यूरेनियम के साथ इन तत्वों की मौजूदगी की संभावना जताई गई है। हालांकि हिमालयी क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन धातुओं की खोज और खनन बड़ी चुनौती है।

रेयर अर्थ धातुएं स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, पवन टरबाइन और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद जरूरी हैं। फिलहाल भारत इन धातुओं के लिए आयात पर निर्भर है। अगर उत्तराखंड में इनका व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन संभव होता है, तो यह न केवल राज्य बल्कि देश की आर्थिक और सामरिक ताकत को भी नया आयाम दे सकता है।

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।


विस्तृत बायो

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