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30 सितम्बर, 2020|1:44|IST

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उत्तराखंड में दावाग्नि के कारणों का पता चलेगा

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उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के कारणों पर बड़े स्तर पर शोध की तैयारी चल रही है। लॉकडाउन में वनाग्नि की काफी कम घटनाएं सामने आने के बाद वन अनुसंधान केन्द्र इस बात पर शोध की योजना बना रहा कि जंगलों में प्राकृतिक तरीके से आग अधिक लग रही है या मानवीय हरकतों के कारण।प्रदेश के 71 प्रतिशत भू भाग में फरवरी से अगस्त तक आग का बड़ा खतरा रहता है। हर साल कई हजार हेक्टेयर जंगल जल जाता है। इससे प्रदूषण के साथ ही वन्यजीवों की क्षति होती है और वनस्पतियां भी नष्ट होती है। लेकिन लॉकडाउन में प्रदेश में ना के बराबर जंगलों में आग लगी है। वन अनुसंसाधन केंद्र के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश के जंगलों में आग मानवीय हस्तक्षेप व प्राकृतिक आग लगने कि घटनाओं की स्थिति साफ नहीं हो पाई है। बताया कि वन अनुसंस्थान केंद्र जंगल मे मानवीय हरकतों से जंगलों में अधिक आग लग रही है या प्राकृतिक से। अध्ययन के बाद जंगल में आग किस वजह से आग लग रही है, इस पर लॉकडाउन खुलने के बाद अध्ययन किया जाएगा।

चार से पांच माह में होगा शोध का काम पूरा

रामनगर। वन अनुसंस्थान केंद्र के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि जंगलों में आग लगने को लेकर चार से पांच माह तक शोध का काम किया जाएगा। जानकारी मिलने पर वनाग्नि की घटनाएं रोकने को योजनाएं बनाई जाएंगी। लॉकडाउन खुलने के बाद शोध पर काम किया जाना है।

पांच सालों के आंकड़ों पर होगा अध्ययन

रामनगर। वन अनुसंस्थान केंद्र के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि आग की घटनाओं का पता लगाने के लिए पिछले पांच सालों के अकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल व इसी साल के वनाग्नि के आंकड़ों पर अध्ययन कर प्राकृतिक व मानवीय हरकतों से लगने वाली घटना का पता किया जाएगा। शोध में सबसे अधिक आग प्राकृतिक ढंग से लग रही हैं या मानवीय हस्तक्षेप से, इसकी सटीक जानकारी मिल पाएगी।

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  • Web Title:Reasons for claim will be known in Uttarakhand