विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस के खाली हाथ; आरोपियों के नेपाल भागने की आशंका, बड़े गैंग से जुड़ रहे तार
प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि हत्याकांड को जमशेदपुर के एक संगठित गिरोह ने अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, राजा शर्मा, विशाल सिंह, आशुतोष सिंह और आकाश प्रसाद की भूमिका प्रमुख मानी जा रही है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की राजपुर रोड पर स्थित पार्श्वनाथ मॉल में शुक्रवार सुबह हुए झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में 60 घंटे बाद भी दून पुलिस खाली हाथ है। हाई प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस और एसटीएफ ने शूटरों की पहचान तो कर ली है, लेकिन वे अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं। पुलिस टीमें उनकी तलाश में उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड में दबिश दे रही हैं। घटना के बाद जमशेदपुर पुलिस ने पहले से तैयार गैंगस्टरों की फाइल के आधार पर उनके और उनके गुर्गों का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। संदिग्ध गतिविधियों वाले अपराधियों से पूछताछ की जा रही है।
हत्या को अंजाम देने वाले शूटरों के नाम आकाश प्रसाद, आशुतोष कुमार सिंह और विशाल हैं। इनका संबंध झारखंड के कुख्यात राजा, विशाल सिंह से होने की संभावना है। पुलिस जांच में शूटरों के बेहद शातिर मूवमेंट का पता चला है। हत्या से दो दिन पहले 11 जनवरी को शूटर झारखंड से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे। वहां से वे हरिद्वार आए। हरिद्वार से उन्होंने किराये पर एक दोपहिया वाहन लिया और देहरादून पहुंचे। लेकिन वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने दूसरी बाइक का इस्तेमाल किया। पुलिस ने भागते वक्त इस्तेमाल की गई बाइक को सहस्रधारा रोड इलाके से बरामद कर लिया है, जिसे शूटरों ने फेंक दिया था।
पुलिस की 10 से ज्यादा टीमें यूपी, बिहार और झारखंड की खाक छान रही हैं। सीसीटीवी सर्विलांस में पता चला है कि हत्या के बाद शूटर हरिद्वार होते हुए यूपी की सीमा में दाखिल हुए थे। इसके बाद उनकी लोकेशन पहेली बनी हुई है। शूटर यूपी के रास्ते बिहार होते हुए या तो झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में छिपे हैं या फिर नेपाल सीमा पार कर सुरक्षित ठिकाने पर निकल गए हैं। जमशेदपुर पुलिस भी इस इनपुट पर काम कर रही है।
शूटर हत्थे नहीं चढ़े तो इनाम घोषित होगा
दून पुलिस के लिए नाक का सवाल बन चुके विक्रम हत्याकांड में पुलिस गिरफ्तारी के लिए हर प्रक्रिया को अपनाने में लगी है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ की टीमें दिन-रात शूटरों की तलाश में जुटी हैं। अगर अगले 24 से 48 घंटों के भीतर आरोपी गिरफ्तार नहीं होते हैं, तो उन पर नकद इनाम घोषित किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही गिरफ्तारी में लगी हुई है।
विक्रम शर्मा के भाई अरविंद से घंटों पूछताछ
विक्रम शर्मा की हत्या महज बाहरी शूटरों का काम नहीं, बल्कि इसके पीछे स्थानीय मिलीभगत भी है। रविवार को पुलिस ने विक्रम के भाई अरविंद शर्मा को हिरासत में लेकर घंटों पूछताछ की। देहरादून में तैनात किए गए एसएसपी प्रेमेंद्र डोबाल ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से गैंगवार और प्री-प्लांड मर्डर है। शूटरों को देहरादून में रुकने, रेकी करने और वारदात के बाद सुरक्षित भागने के लिए स्थानीय स्तर पर मदद मिली। पुलिस ने कई संदिग्धों को रडार पर लिया है। जल्द ही खुलासा होगा।
शहर के संगठित गिरोह पर भी शक
प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि हत्याकांड को जमशेदपुर के एक संगठित गिरोह ने अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, राजा शर्मा, विशाल सिंह, आशुतोष सिंह और आकाश प्रसाद की भूमिका प्रमुख मानी जा रही है। तीनों आरोपी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वारदात के पीछे गैंगवार, आपसी रंजिश या वर्चस्व की लड़ाई का एंगल तो नहीं है। विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके विरोधी सक्रिय बताए जाते हैं।
डिजिटल ट्रैकिंग पर जांच केंद्रित
देहरादून पुलिस की विशेष टीम अब आरोपियों की डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है। सीडीआर, लोकेशन ट्रैकिंग और संदिग्ध नंबरों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। घटना के समय मॉल और उसके आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की सूची तैयार की गई है। देहरादून और जमशेदपुर पुलिस के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है। तकनीकी साक्ष्य और खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आगे बढ़ी है।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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