जहां रुकती थी बाबा केदार की डोली, वहीं PM मोदी ने की 3 महीने साधना; 2013 आपदा की यादें

बद्री नौटियाल, रुद्रप्रयाग, हिन्दुस्तान
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केदारनाथ पहुंच रहे यात्री उस वक्त भावुक हो गए, जब उन्हें 2013 आपदा की यादें ताजा हुईं। पहले गरुड़चट्टी पर बाबा केदार की डोली रुकती थी। इसी स्थान पर पीएम मोदी ने 80 के दशक में तीन महीने साधना की थी।

जहां रुकती थी बाबा केदार की डोली, वहीं PM मोदी ने की 3 महीने साधना; 2013 आपदा की यादें

केदारनाथ यात्रा के लिए वर्ष 2013 की आपदा से पहले वाले रामबाड़ा-केदारनाथ पैदल मार्ग से कई यात्रियों की गहरी यादें जुड़ी हैं। 13 साल बाद जो यात्री केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं वे गरुड़चट्टी और देवदर्शनी की एक झलक पाने को बेताब दिख रहे हैं। हालांकि आपदा के बाद बनाए गए लिंचौली मार्ग से ही गरुड़चट्टी का दृश्य देखकर यात्री संतोष कर रहे हैं। पुराने पैदल मार्ग पर गरुड़चट्टी एक विशेष स्थान है। यहां पर बाबा केदार की डोली रुकती थी। यहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 महीने साधना की थी।

केदारनाथ यात्रा पर आने वाले हजारों यात्रियों में कई यात्री ऐसे हैं जो वर्ष 2010, वर्ष 2012 में केदारनाथ की यात्रा पर आए हैं। हालांकि बीच में वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ आने से ही लोग डरने लगे थे किंतु आपदा के 13 सालों के बाद आ रहे कई यात्री अपनी पुरानी यादों को भुला नहीं पा रहे हैं। उस वक्त उन्होंने केदारनाथ की यात्रा गौरीकुं-रामबाड़ा-केदारनाथ 14 किमी पैदल मार्ग से की है। अब गौरीकुंड-भीमबली-लिंचौली-केदारनाथ 16 किमी पैदल मार्ग से यात्रा की जा रही है। ऐसे में वे यात्री भावुक भी हो रहे हैं।

2013 आपदा की यादें ताजा

मध्य प्रदेश के 77 वर्षीय धानेश बताते है कि मैंने वर्ष 2010 में बाबा केदार की यात्रा की। बहुत ही आनंदित यात्रा थी। एक ओर गौरीकुंड से चलकर रामबाड़ा में रुके और फिर धीरे-धीरे गरुड़चट्टी और देवदर्शनी होते हुए केदारनाथ पहुंचे। देवदर्शनी से मंदिर देखकर मानों ऐसा लगा कि बाबा केदार के दर्शन हो गए। आज काफी बदलाव हो गया है। पुराने मार्ग से कई यादें जुड़ी है, इस बार यात्रा पर आया तो पुरानी यात्रा के उन स्थानों को जानने की जिझासा बनी रही। धानेश जैसे कई यात्री है जो वर्ष 2011, वर्ष 2012 में यात्रा पर आए हैं उन्हें केदारपुरी के नए और भव्य स्वरूप से खुशी तो हो रही है किंतु पुराने मार्ग से जुड़ी यादों को साझा करने से नहीं भूल रहे हैं।

जहां रुकती थी बाबा केदार की डोली, पीएम मोदी ने की साधना

पुराने पैदल मार्ग पर गरुड़चट्टी एक विशेष स्थान है। यहां पर बाबा केदार की डोली आते-जाते वक्त रुका करती थी। बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए यहां चाय-पानी की सुविधा थी। साधु संत ठहरते रहे हैं। हालांकि गरुड़चट्टी आपदा के बाद भी सुरक्षित है और यहां अब भी लोग पहुंचते रहते हैं। इसी स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 के दशक में तीन महीने साधना की थी। इसलिए उनका भी इस स्थान से अगाध प्रेम है।

बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे सांसद

उत्तर प्रदेश के कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय से संबंधित विभागीय संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष बृज लाल अपनी पत्नी सहित सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रविवार को केदारनाथ धाम पहुंचे। इस मौके पर बीकेटीसी एवं प्रशासन की टीम ने उनका स्वागत किया। केदारनाथ पहुंचने पर समिति के अध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल ने बाबा केदार के दर्शन कर प्रदेश की देश और प्रदेश के सुख शांति की प्रार्थना की। प्रतिनिधिमंडल में सरोज, दिनेश भाई मकवाना आदि मौजूद रहे।

गंगोत्री-यमुनोत्री धामों में लगातार बढ़ रहे श्रद्धालु

उत्तरकाशी। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में लगातार भारी मात्रा में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दोनों धामों में प्रतितदिन 10 से 12 हजार यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। अभी तक अनुमानित 3.3 लाख यात्री गंगोत्री और यमुनोत्री में दर्शन कर चुके हैं। बढ़ते तीर्थाटन से तीर्थस्थानों में रौनक बढ़ गई है। साथ ही होटल प्रतिष्ठानों में भी खुशी की लहर देखने को मिली है। उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा अपने पूरे शबाब पर है। 19 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार रिकॉर्ड बढोत्तरी दर्ज की जा रही है। अब यात्रा का दूसरा चरण सुचारू रूप से चल रहा है।

Gaurav Kala

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