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चौथे स्तंभ के रुप में पत्रकारिता का प्रभाव कम होना चिंताजनक

जनपद में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कई संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित कर हिन्दी पत्रकारिता और लोकतंत्र में उसकी महत्ता पर चर्चा की। इस दौरान पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किए।कहा कि पत्रकारिता का प्रभाव लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रुप में धीरे धीरे कम हो रहा है। यह चिंताजनक है। बुधवार को हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर जिला पत्रकार संगठन ने गोष्ठी की। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि विश्व में जितनी तेजी से पत्रकारों की हत्या की जा रही है। उसकी तुलना में हत्यारों के खिलाफ क्रोध की अभिव्यक्ति नहीं हो रही है। कहा कि इससे साफ है कि विश्व में सरकारें पत्रकारों को संचार का साधन मान रही हैं। पत्रकारों की लोकतंत्र के प्रहरी की छवि कम हो रही है।गोष्ठी में दो मिनट का मौन रखकर पिछले वर्ष विश्वभर में पत्रकारिता के दौरान मारे गए पत्रकारों को श्रद्धांजलि दी गई। गोष्ठी में जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष बीडी कसन्याल, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पुनेठा, चंद्रशेखर द्विवेदी, कोमल मेहता, कुंडल चौहान, ओपी अवस्थी, कमलेश पाठक, रमेश गड़कोटी, कालिका रावल, दिनेश अवस्थी, प्रकाश पांडे, सुरेंद्र खत्री, जुगल किशोर पांडे, बृजेश तिवारी, विपिन गुप्ता मौजूद रहे।

समृद्ध रहा है हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास

पिथौरागढ़। सूचना विभाग के सभागार में हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर हिन्दी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां विषय पर गोष्ठी की गई। इस दौरान पत्रकारों ने हिन्दी पत्रकारिता के अतीत को समृद्ध बताते हुए वर्तमान में आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा की।बुधवार को आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पुनेठा ने की। इस दौरान श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष सुशील खत्री, पत्रकार विजय वर्धन उप्रेती, जुगल किशोर पाण्डे, कुंडल चौहान, कमल पाठक,विपिन गुप्ता, जुगल किशोर पाण्डे सहित कई शामिल रहे। संचालन डीआईओ गिरिजा शंकर जोशी ने किया। उन्होंने सभी पत्रकारों को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की बधाई दी।-

पत्रकारिता दिवस पर सोर वैली और निखिलेश्वर चिल्ड्रन एकेडमी में हुए कार्यक्रम

पिथौरागढ़। हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सोर वैली और निखिलेश्वर चिल्ड्रन एकेडमी में हुए कार्यक्र में सामाजिक चिंतक डॉ. तारा सिंह ने कहा कि संघर्षों, बलिदान से ही हमारे प्रदेश में पत्रकारिता विकसित हुई है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को पत्रकारिता दिवस का महत्व बताया। कहा हिंदी का पहला अखबार 1826 में उदन्त मार्तण्ड यानि उगता सूर्य था। कहा 1907 में प्रकाशित स्वराज्य के 10 संपादकों को 125 साल की सजा हुई। इस दौरान प्रधानाचार्य ममता सिंह, लीलवती जोशी सहित कई लोग शामिल रहे।

महाविद्यालय में मनाया गया पत्रकारिता दिवस

पिथौरागढ़। एलएसएम महाविद्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कार्यक्रम हुआ। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डीएस पांगती ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी पत्रकारिता के क्षेत्र में कैरियर बना सकते हैं। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ल ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता का गहरा रिश्ता है। हिंदी के अधिकांश साहित्यकार पत्रकार ही रहे। कहा हिंदी के प्रचार -प्रसार में पत्रकारिता का अमूल्य योगदान रहा है। इस दौरान डॉ. मनीषा पांडे ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में स्त्रियों की सहभागिता पर विचार प्रकट किए। इस दौरान विद्यार्थियों ने केक काटकर जश्न मनाया। कार्यक्रम में नीमा, कविता थापा,पुष्पा, कविता नाथ, दीपा, सुमन, ममता, प्रीति सहित कई लोग शामिल रहे।

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  • Web Title:The impact of journalism on the fourth pillar is worrisome