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आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बढ़े मानदेय को बताया झुनझुना

केंद्र सरकार की ओर से आशाओं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा के बाद उनमें आक्रोश है। उन्होंने मानदेय बढ़ाने को कार्यकत्रियों का अपमान बताया है। कहा है कि उनका मासिक वेतन 18 हजार नहीं किया गया तो उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा। मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से आशाओं का मानदेय दोगुना कर दिया था। इसके बाद भी आशाओं में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। एक्टू जिलाध्यक्ष हीरा भट्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री की यह घोषणा महज एक चुनावी है। कहा कि कर्मचारी यूनियन ने मांग की थी कि न्यूनतम मासिक वेतन 18000 किया जाए, लेकिन प्रधानमंत्री ने वर्कर्स को सिर्फ झुनझुना पकड़ाने का काम किया है। एक ओर उनकी सरकार आईसीडीएस के बजट में कटौती कर रही है, वहीं दूसरी ओर मानदेय बढ़ाने की बात भी कर रही है। जब आईसीडीएस में बजट ही नहीं आएगा तो बढ़ा हुआ मानदेय कैसे मिलेगा। कहा कि इसी तरह आशाओं का मानदेय दुगना करने की भी घोषणा की गई है। लेकिन आशाओं को किसी प्रकार का मानदेय मिलता ही नहीं है। उन्होंने मांग नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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  • Web Title:Asha and Anganwadi activists announcing increased gratitude