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23 नवंबर, 2020|6:15|IST

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खड़ा दीया अनुष्ठान के लिए पंजीकरण शुरू

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जिले के गगवाड़स्यूं घाटी स्थित सिद्धपीठ देवलेश्वर महादेव मंदिर में खड़ा दीया अनुष्ठान के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है। मंदिर में निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करते हैं। उन्हें अनुष्ठान के बाद संतान का सुख प्राप्त होता है। घाटी के विभिन्न गांवों के ग्रामीण मंदिर परिसर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले का आयोजन करते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी को देखते हुए मेले के स्वरूप को सीमित ही रखा गया है। छह दिनों तक चलने वाला बैकुंठ चतुर्दशी मेला इस वर्ष मात्र दो दिन का होगा। मंदिर समिति मेले की तैयारियों में जुट गई है।

गगवाड़स्यूं घाटी स्थित बलोड़ी गांव में सिद्धपीठ देवलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर के महात्म्य का वर्णन केदारखंड के स्कंदपुराण में मिलता है। मंदिर की स्थापना देवल ऋषि द्वारा की गई थी। मंदिर परिसर के चारों ओर सूर्य, नारद, पार्वती व गणेश कुंड हैं। मंदिर में सनातन समय से निःसंतान दंपत्तियां संतान प्राप्ति के लिए खड़ा दीया अनुष्ठान करते हैं। सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर समिति ने अनुष्ठान के लिए पंजीकरण शुरूरु कर दिया है। निःसंतान दंपत्तियां 28 नवंबर को सुबह तक पंजीकरण करवा सकते हैं। मंदिर परिसर में घाटी के 34 गांवों के ग्रामीण एकजुटता के साथ छह दिनों का बैकुंठ चतुर्दशी मेला आयोजित करते आ रहे हैं। जिसमें खेल प्रतियोगिताएं, मैराथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रात्रि जागरण सहित अनेक गतिविधियां आयोजित होती थी। लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष समिति ने मेले के स्वरुप को सीमित रखा है। सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर समिति के सचिव जगत किशोर बड़थ्वाल ने बताया कि इस वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी मेला 28 व 29 नवंबर को आयोजित होगा। 28 नवंबर की सुबह तक खड़ा दीया अनुष्ठान के लिए निःसंतान दंपत्ति निःशुल्क पंजीकरण करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 28 नवंबर को कलश यात्रा सहित शिव ध्वजा डडुवा देवी कुंड स्नान के बाद मंदिर में चढ़ाई जाएगी। इसके बाद शाम को खड़ा दीया अनुष्ठान व रात्रि जागरण होगा। बताया कि 29 को सीमित लोगों की उपस्थिति में महिला मंगल दलों की प्रस्तुति, संस्कृति विभाग की टीमों द्वारा कार्यक्रम, देवपूजन व प्रसाद वितरण के साथ मेला संपन्न हो जाएगा।

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  • Web Title:Registration starts for the standing diya ritual