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पहली बार संसद में उठा एनआईटी सुमाड़ी का मुद्दा

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड का मुद्दा पहली बार देश की संसद में उठा। गढ़वाल सांसद ने संसद के शून्य सत्र में एनआईटी का मामला उठाते हुए कहा कि एनआईटी के स्थाई परिसर का निर्माण श्रीनगर के सुमाड़ी श्रीनगर में जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

प्रदेश को केंद्र सरकार ने साल 2009 में एनआईटी की सौगात दी। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डा़ रमेश पोखरियाल निशंक ने एनआईटी की स्थापना सुमाड़ी में किए जाने की घोषणा की लेकिन संस्थान के स्थाई परिसर का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। जिससे जनता में आक्रोश बढ़ गया। प्रदेश सरकार इस ओर ठोस पहल करने में नाकाम साबित हुई। एनआईटी की स्थापना को लेकर एक बार फिर जन आक्रोश तब बढ़ गया, जब बीते दिसंबर को एनआईटी उत्तराखंड के 600 से अधिक छात्र-छात्राओं को एनआईटी जयपुर शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन आज तक एनआईटी को लेकर किसी भी जनप्रतिनिधि ने विधानसभा या संसद में मामला नहीं उठाया। नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने एनआईटी के स्थाई परिसर निर्माण का मुद्दा संसद में उठाते हुए कहा कि एनआईटी साल 2009 में खुली, जिसका अस्थाई परिसर पालीटेक्निक श्रीनगर में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सुमाड़ी व आसपास के ग्रामीणों ने स्थाई परिसर निर्माण को 350 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई, जो संस्थान के नाम दर्ज है। कहा कि संस्थान के 625 छात्रों को जयपुर भेज दिया गया है जिससे जनता में आक्रोश है और छात्रों में अपने भविष्य को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। कहा संस्थान के परिसर निर्माण को जमीन व धनराशि उपलब्ध है। सांसद ने केंद्र सरकार व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से स्थाई परिसर निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाने की मांग की।

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  • Web Title: NIT Sumadi s issue for the first time in Parliament