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गुरु बीसी खंडूड़ी की राजनीतिक विरासत शिष्य तीरथ के नाम

लोकसभा की गढ़वाल सीट पर बीसी खंडूड़ी की राजनीतिक विरासत को उनके शिष्य तीरथ सिंह रावत ने अपने नाम कर ली। बीजेपी ने अब तक सबसे बड़े अंतर से इस सीट पर अपना दुर्ग फहरा दिया। गढ़वाल सांसद बीसी खंडूड़ी के इस बार मैदान में नहीं होने पर लोकसभा की इस सीट पर दोनों ही प्रमुख दलों में इस बार खंडूड़ी की राजनीतक विरासत अपने नाम की लड़ाई भी दिख रही थी। मैदान में नहीं होने के बावजूद भी पूरे चुनावों में गढ़वाल सीट पर राजनीति बीसी खंडूड़ी के ईद-गिर्द ही घुमती रही। चुनाव के दौरान गढ़वाल सीट के केंद्र में रहे बीसी खंडूड़ी हालांकि पूरे चुनावों में प्रचार में नहीं दिखे। स्वास्थ्य खराब होने कि कारण वह वोट देने भी नहीं आए, लेकिन इसके बावजूद 2019 इस संसदीय चुनाव में वह धूरी बने रहे। इस सीट पर जीत का परचम लहराने वाले तीरथ सिंह रावत भी कहते रहे कि उन्हें बीसी खंडूड़ी का आशीर्वाद प्राप्त है। वहीं राजनीति का नफा नुकसान भांपते हुए कांग्रेस ने पूर्व सीएम एवं गढ़वाल सांसद बीसी खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी पर ही दांव खेला था । हालांकि लोकसभा के लिहाजा से चुनावी समर में मनीष खंडूड़ी को उतरने में भी देरी हो गई। लंबे लोकसभा क्षेत्र में प्रचार का समय भी कम मिला और कुछ पार्टी संगठन की कमजोरी भी रही। लिहाजा वह इस चुनावी अवसर को भुना नहीं सके और पिता की राजनीतिक विरासत को अपने नाम नहीं कर सके। 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में गढ़वाल सीट पर बीसी खंडूड़ी ने 1 लाख 84 हजार 526 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी डा.हरक सिंह रावत को हरा दिया था। वहीं इस बार मैदान में उतरे उनके शिष्य तीरथ सिंह रावत ने अब तक के सबसे बड़े अंतर से तीन लाख से अधिक वोटों से जीत लिया।

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