काम की बात: उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब बेड पर ही हो सकेगा मरीजों का सीटी स्कैन
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गंभीर हालत वाले मरीजों का अब उनके बेड पर ही सीटी स्कैन करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए पोर्टेबल सीटी स्कैन मशीनें मंगाई जाएंगीं। इनके लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा।

उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती गंभीर हालत वाले मरीजों को एक बड़ी राहत देने वाली खबर है। पोर्टेबल एक्सरे मशीन की तर्ज पर अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी चलती-फिरती सीटी स्कैन मशीन मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही आईसीयू, इमरजेंसी और वार्ड में भर्ती मरीजों का सीटी स्कैन सीधे बेड पर होने लगेगा।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्य के निर्देश पर यह कवायद की जा रही है। हाल ही में देहरादून, श्रीनगर, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और हरिद्वार मेडिकल कॉलेजों के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की बैठक में इस तकनीक पर प्रेजेंटेशन दिया गया। इस बैठक में दून मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय, न्यूरो सर्जन डॉ. डीपी तिवारी और फिजिशियन डॉ. अरुण पांडेय सहित कई विशेषज्ञ पहुंचे थे।
ईपी लैब योजना फिलहाल अटकी
स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की इस बैठक में सामने आया कि विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में हृदय की अनियमित धड़कन के इलाज के लिए प्रस्तावित अत्याधुनिक ईपी लैब (इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी लैब) फिलहाल डॉक्टरों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। देहरादून में विशेषज्ञ डॉक्टर के त्याग-पत्र के बाद यह प्रक्रिया ठप हो गई है।
टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी
दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि पोर्टेबल सीटी स्कैन मशीन से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। निदेशालय स्तर पर प्रस्तुतीकरण हो चुका है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गंभीर मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
यह मोबाइल सीटी स्कैन तकनीक खासतौर पर सड़क हादसे में घायल, सिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी) और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों के लिए उपयोगी साबित होगी। अभी तक ऐसे मरीजों को रेडियोलॉजी विभाग तक ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है। नई व्यवस्था के बाद मरीजों को शिफ्ट नहीं करना पड़ेगा, जिससे जांच और इलाज में लगने वाला समय बचेगा और जोखिम भी कम होगा।
प्रदेश के अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए बेड बढ़ेंगे
राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में एचडीयू और आईसीयू बेड बढ़ाए जाएंगे। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग में गैप एनालिसिस के लिए गठित कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इस संदर्भ में कार्रवाई शुरू की जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने गैप एनालिसिस कमेटी गठित की थी। चिकित्सा शिक्षा विवि के पूर्व कुलपति प्रो हेमचंद्रा की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी ने गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा बढ़ाने के लिए आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) और एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) में बेड बढ़ाने की सिफारिश की थी। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के स्तर पर इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। पहले चरण में सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर फोकस है।
आईसीयू में बेड के लिए राज्य भर में मारामारी
राज्य के मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों के आईसीयू में गंभीर मरीजों के लिए बेड मुश्किल से मिल पाते हैं। एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज,हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पतालों में भी लोगों को बेड के लिए खासा परेशान रहना पड़ता है। जबकि जिला अस्पतालों के आईसीयू में तो बेड की स्थिति और खराब है। सरकारी स्तर पर गंभीर मरीजों के लिए वर्तमान में आईसीयूू, एचडीयू और ओटी के बेड की संख्या तीन हजार के करीब है। जबकि इनकी संख्या को पांच हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मेडिकल कॉलेजों में 25 फीसदी बेड रिजर्व होंगे
सिफारिशों के अनुसार राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कुल बेड में से गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू, एचडीयू और ऑपरेशन थिएटर में कुल 25 फीसदी बेड रिजर्व किए जाने की जरूरत है। कुछ समय पूर्व नेशनल मेडिकल कमिशन ने भी इन सेवाओं के लिए 20 से 25 फीसदी बेड रिजर्व करने की संस्तुति दी थी। इसी के आधार पर भी कमेटी ने राज्य में इस श्रेणी के बेड की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई है।
बता दें कि, उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार मरीजों की सुविधाओं के लिए शुरुआत से ही नए नए कदम उठा रही है।
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Praveen Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


