मिसाइल हमलों से दहल रहे दुबई और अबूधाबी; खाड़ी देशों में भारतीयों ने बताई आंखों-देखी
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खामियाजा खाड़ी देश भुगत रहे हैं। यहां फंसे हजारों प्रवासी भारतीय परेशान और बैचेन हैं। भारत में भी उनके घरों में उतनी ही बेचैनी बढ़ रही है।

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों, विशेषकर दुबई और अबूधाबी में रह रहे हजारों प्रवासी भारतीय खौफजदा हैं। आसमान में उड़ती मिसाइलें, कान फाड़ देने वाले धमाके और मोबाइल पर बजते 'वॉर अलर्ट' के सायरन ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। हालात इतने खौफनाक हैं कि लोग जीवन बचाने के लिए महीनों का राशन इकट्ठा कर रहे हैं। अपने प्रियजनों को फोन पर हालात बयां कर रहे हैं।
'आंखों के सामने लाइव जंग'
दुबई के पॉश इलाके पाम जुमेराह से लेकर ग्रेटर दुबई तक सन्नाटा और डर पसरा है। देहरादून निवासी गौरव पेटवाल ने दुबई से बताया कि पाम जुमेराह की एक इमारत में धमाके के बाद लगी आग ने अफरा-तफरी मचा दी। रात भर धमाकों की आवाजों ने लोगों को सोने नहीं दिया। वहीं, चम्पावत के नवीन सिंह बोहरा ने अबूधाबी से खौफनाक मंजर साझा करते हुए कहा, “मैंने जीवन में कभी ऐसी 'लाइव जंग' नहीं देखी। हमारे फ्लैट के ऊपर से मिसाइलें गुजर रही हैं, जो जमीन पर गिरते ही धरती हिला देती हैं। काले धुएं के गुबार देखकर रूह कांप जाती है।”
मोबाइल पर 'वॉर सायरन' और भागते लोग
टिहरी के प्रतापनगर निवासी महेश दुमोगा और डोबरा-चांटी के दौ दौलत रावत ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए बताया कि शनिवार की रात खौफनाक थी। जैसे ही आसमान में मिसाइलें दिखती हैं, सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट मोबाइल पर अलार्म की तरह बजने लगता है। महेश ने बताया, "शनिवार रात तीन बार हमें अपनी बिल्डिंग छोड़कर सड़क पर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। बाजार बंद हैं और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।"
राशन की किल्लत और पलायन का डर
जंग की आहट के बीच दुबई के डिपार्टमेंटल स्टोरों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग हफ्तों और महीनों का राशन, दवाइयां और रोजमर्रा का सामान जमा कर रहे हैं। कई स्टोरों में सब्जियां और पानी खत्म हो चुका है। कंपनियों ने साइट्स पर काम करने वाले मजदूरों को हटाकर सुरक्षित कैंपों में भेज दिया है।
ईरान में फंसे उत्तराखंड के लाल
जहां दुबई-अबूधाबी में मिसाइलों का साया है, वहीं ईरान में इंटरनेट बंद होने से परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ गई है। हरिद्वार के मंगलौर क्षेत्र के 40 से अधिक छात्र ईरान में फंसे हुए हैं। पिछले 24 घंटों से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनके माता-पिता और परिजन बेहद गमगीन हैं। देहरादून के दीपलोक कॉलोनी की जैबुन जैदी की बहन हुमा, उनके पति और दो छोटे बच्चे ईरान में हैं। शनिवार से उनका फोन और मैसेज नहीं लग रहा है, जिससे परिवार गहरे सदमे में है।
उत्तराखंड सरकार को केंद्र के निर्देशों का इंतजार
ईरान की ओर से किए गए हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों ने खाड़ी देशों, विशेषकर दुबई में रह रहे उत्तराखंड के प्रवासियों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड की विशेष सचिव (गृह) निवेदिता कुकरेती ने कहा है कि राज्य सरकार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। उत्तराखंड की ओर से अब तक स्वतंत्र हेल्पलाइन नंबर या विशेष एडवाइजरी जारी नहीं की है। जैसे ही केंद्र से कोई गाइडलाइन आएगी, राज्य सरकार त्वरित कार्रवाई करेगी। फिलहाल राज्य का गृह मंत्रालय 100 नंबर पर आने वाली सूचनाओं और कॉल्स के डेटा को एकत्रित कर रहा है ताकि प्रभावितों की संख्या का आकलन किया जा सके। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा का मामला प्राथमिक रूप से केंद्र के अधीन है। फिलहाल नई दिल्ली विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर ही फंसे हुए भारतीयों की जानकारी दर्ज की जा रही है।
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