पाकिस्तानी सिख परिवार को तुरंत भारत छोड़ने का आदेश, 2019 से देहरादून में बसा; HC पहुंचा मामला

लाइव हिन्दुस्तान, नैनीताल
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 पाकिस्तान के खैबर पख्तून से भारत आया सिख परिवार साल 2019 से देहरादून में रह रहा है। सरकार ने परिवार को देश छोड़ने का आदेश दिया है। परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है।

पाकिस्तानी सिख परिवार को तुरंत भारत छोड़ने का आदेश, 2019 से देहरादून में बसा; HC पहुंचा मामला

भारत में 2019 से रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार को सरकार ने देश छोड़ने का आदेश दिया है। परिवार ने सरकार के आदेश के खिलाफ नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले में हाई कोर्ट ने कहा कि अगर परिवार से देश को खतरा है तो उन्हें वापस पाकिस्तान भेजा जा सकता है, लेकिन इससे पहले केंद्र और राज्य सरकार मामले में स्पष्टता तय रहे।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून में रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार को देश छोड़ने के राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की थी। वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने कहा कि यदि परिवार से देश को खतरा है तो उन्हें उनके वतन पाकिस्तान भेजा जा सकता है। यदि खतरा नहीं है तो सोमवार तक केंद्र एवं राज्य सरकार निर्णय लेकर कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करे।

2019 को वीजा पर भारत आया था परिवार

मामले के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तून के रहने वाला सिख परिवार 2019 में लॉन्ग टाइम वीजा पर भारत आया था। परिवार देहरादून के बसंत बिहार में रहता है। परिवार ने पहले 2024 तक और अब दिसंबर 2026 तक वीजा की अवधि बढ़ा ली है। बीती 31 मई को राज्य सरकार ने पाकिस्तानी परिवार को 24 घंटे का नोटिस देकर देश छोड़ने के लिए कहा। यह नोटिस परिवार को दो जून को प्राप्त हुआ। इसे परिवार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता मनजीत ने कहा कि अभी उनके वीजा की अवधि समाप्त नहीं हुई है। उसके तीन बच्चे हैं।

दोनों बेटियां भारत में पढ़ाई कर रहीं

बड़ी लड़की बीटेक और दूसरी लड़की बीडीएस की पढ़ाई कर रही है। लड़का छोटा है। ऐसे में उसे वीजा की अवधि तक भारत में रहने दिया जाए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि देहरादून में जिस जगह मनजीत का परिवार रहता है, वहां पर आईटीबीपी का मुख्यालय है। इससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए परिवार को उनके देश पाकिस्तान वापस भेजा जाए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई 15 जून को रखी है।

सरकार के शपथ पत्र का अवलोकन करे याचीः हाई कोर्ट

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों में सजा पूरी कर चुके कैदियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी रिहा नहीं करने के मामले में स्वत: संज्ञान लिए जाने वाली जनहित याचिका समेत कई कैदियों की याचिकाओं पर गुरुवार को भी सुनवाई की।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से राज्य सरकार के शपथपत्र का अवलोकन करें और कोर्ट को अवगत कराने को कहा है। अगली सुनवाई 15 जून को होगी। सुनवाई पर राज्य सरकार ने स्थिति से अवगत कराते हुए कहा है, कि कैदियों की रिहाई से पहले यह देखना आवश्यक है, कि रिहा करने पर समाज या पास-पड़ोस को कोई खतरा तो उत्पन्न नहीं होगा। जेल में बिताए गए सालों में उनके व्यवहार में बदलाव आया है या नहीं। उनकी आर्थिक स्थिति और मनोदशा कैसी है। इन सबका अवलोकन किया जा रहा है। ऐसे में विचार करने को समय दिया जाए। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी है। उसका अवलोकन सरकार कर रही है।

याचिकाओं में कहा गया कि उनकी सजा पूर्ण हो चुकी है। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को निर्देश देकर कहा था, कि आदेश का अनुपालन करवाया जाए। जिन कैदियों की सजा पूर्ण हो चुकी है उन्हें रिहा करने के आदेश दिए जाएं। पूर्व में हाईकोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं करने पर इस मामले की स्वत: संज्ञान लिया और जेलों का दौरा भी किया। इस दौरान जेलों में 167 ऐसे कैदी मिले, जिनकी सजा पूरी हो चुकी थी।

Gaurav Kala

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