उत्तराखंड में स्कूल बसों के लिए नया किराया तय, एक अप्रैल से लागू होगा; देखें लिस्ट
उत्तराखंड में स्कूल बस और वैन का मासिक किराया नए शैक्षिक सत्र यानी एक अप्रैल से लागू हो जाएगा। राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) में किराया निर्धारण प्रस्ताव मंजूर होने के बाद परिवहन विभाग इसे लागू करने की औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गया है।

उत्तराखंड में स्कूल बस और वैन का मासिक किराया नए शैक्षिक सत्र यानी एक अप्रैल से लागू हो जाएगा। राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) में किराया निर्धारण प्रस्ताव मंजूर होने के बाद परिवहन विभाग इसे लागू करने की औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गया है। परिवहन उपायुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने गुरुवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि जल्द से जल्द किराये के विधिवत आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
मालूम हो कि शिक्षा विभाग के अनुरोध पर राज्य परिवहन प्राधिकरण ने पहली बार स्कूल बस और वैन का किराया तय किया है। इसके तहत स्कूल बस संचालक एक से दस किलोमीटर की दूरी तक अधिकतम 2200 रुपये, 10 से 20 किलोमीटर तक 2700 रुपये, 20 से 30 किलोमीटर तक 3200 रुपये और 30 किलोमीटर से अधिक दूरी पर प्रति छात्र 3700 रुपये किराया ले सकते हैं। उधर, उत्तराखंड स्कूल वैन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने परिवहन विभाग से किराया और छात्रों की सुरक्षा के मानको को सख्ती से लागू करने की मांग की है।
स्कूल वैन और टैक्सी-मैक्सी कैब किराया
दूरी किराया
1-5 किमी 2100
5-10 किमी 2500
10-20 किमी 3000
20 से अधिक 3500
सेवा विस्तार का फैसला रद्द न हुआ तो आंदोलन
जीएमओयू और रूपकुंड पर्यटन विकास समिति की बसों को देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश तक चलाने की अनुमति देने का विरेाध शुरू हो गया। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी ने गुरूवार को हिन्दुस्तान से कहा कि यह फैसला रोडवेज के हितों के खिलाफ तो ही है, मानकों का भी उल्लंघन है। ये सभी राष्ट्रीयकृत मार्ग है। इन पर निजी आपरेशन को बस संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, सभी रूट व्यावसायिक रूप से सशक्त रूट हैं। निजी आपरेटरों की बसों के संचालन की अनुमति देकर रोडवेज के हितों पर कुठाराघात किया है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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