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UCC में बड़ा बदलाव करेगी सरकार, लिव-इन रिलेशन पर नियम और सख्त; इन मामलों में छूट

UCC में बड़ा बदलाव करेगी सरकार, लिव-इन रिलेशन पर नियम और सख्त; इन मामलों में छूट

संक्षेप: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर साफ किया है कि यूसीसी नियमावली के प्रविधानों में संशोधन किया जा रहा है। लिव-इन रिलेशन पर नियम और सख्त होंगे।

Thu, 16 Oct 2025 12:35 PMGaurav Kala हल्द्वानी
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उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियमों में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। नए प्रस्ताव के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण पर कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट में दाखिल शपथपत्र में सरकार ने बताया कि लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और अस्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाया जाएगा। अब रजिस्ट्रार केवल उन्हीं मामलों में इनकार कर सकेंगे, जहां संबंध कानूनी या धार्मिक प्रथाओं के प्रत्यक्ष उल्लंघन में हों।

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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपााध्याय की खंडपीठ में महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर की ओर से पेश 78 पेज के शपथपत्र में कहा गया है कि संशोधनो में मैरिज रजिस्ट्रार ने लिव-इन रिलेशनशिप संबंधी बयान को खारिज करने के निर्णय को चुनौती देने को आवेदकों के लिए उपलब्ध समय, अस्वीकृति आदेश प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन की बजाय बढ़ाकर 45 दिन करने का प्रस्ताव है।

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ये होंगे नए नियम

मामले के अनुसार, रीति-रिवाजों और प्रथाओं के आधार पर पंजीकरण अस्वीकार करने संबंधी प्रस्तावित प्रावधानों को सख्त कर दिया है। विशेष रूप से इनकार करने की शक्ति को संहिता के प्रत्यक्ष उल्लंघन से जोड़ा गया है। मूल प्रावधान के अनुसार, यदि रजिस्ट्रार इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि रीति-रिवाज और प्रथाएं पंजीकृत व्यक्तियों के बीच विवाह की अनुमति नहीं देती हैं, तो लिव-इन संबंध को पंजीकृत करने से इनकार कर दिया जाएगा।

अब, प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि रजिस्ट्रार इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि रीति-रिवाज और प्रथा पंजीकृत लोगों के बीच विवाह की अनुमति नहीं देती हैं, तो वह लिव-इन संबंध को पंजीकृत करने से इनकार कर देंगे।

यूसीसी की धारा 380

धारा 380 उन शर्तों को सूचीबद्ध करती है, जिनके तहत लिव-इन संबंध पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। यदि साथी निषिद्ध स्तर के संबंध में हैं। यदि एक या दोनों पहले से ही विवाहित हैं या किसी अन्य लिव-इन संबंध में हैं, या यदि कोई नाबालिग है। हाईकोर्ट की खंडपीठ में प्रस्तुत यह शपथपत्र लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण और समाप्ति की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, पुलिस के साथ सूचना साझा करने पर अधिक स्पष्टता लाने और अस्वीकृत आवेदनों के लिए अपील की अवधि बढ़ाने पर केंद्रित है।

Gaurav Kala

लेखक के बारे में

Gaurav Kala
गौरव काला को नेशनल, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय, क्राइम और वायरल समाचार लिखना पसंद हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 10 साल कार्य का अनुभव। लाइव हिन्दुस्तान से पहले अमर उजाला, दैनिक जागरण और ईटीवी भारत जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। और पढ़ें

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