साइबर क्राइम बढ़ा, महिला अपराध घटा; उत्तराखंड को लेकर क्या कहती है NCRB की रिपोर्ट
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट ने उत्तराखंड में अपराध की बदलती प्रकृति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जहां पारंपरिक और गंभीर अपराध में कमी दर्ज की गई, वहीं साइबर क्राइम अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट ने उत्तराखंड में अपराध की बदलती प्रकृति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जहां पारंपरिक और गंभीर अपराध में कमी दर्ज की गई, वहीं साइबर क्राइम अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में साइबर अपराधों में चिंताजनक रूप से 17 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें भी 70 फीसदी मामले में वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं। यह वृद्धि यहां वर्ष 2023 के मुकाबले 2024 में दर्ज मामलों के आधार पर है। उत्तराखंड में पुलिस साइबर अपराधों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर रही है।
दूसरे राज्यों के मुकाबले साइबर अपराधों के खुलासे में उत्तराखंड आगे है। प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध में मामूली कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला अपराध में 1.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पुलिस की सक्रियता, महिला हेल्प डेस्क और त्वरित कार्रवाई से महिला अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिली है।
हत्या, लूट और डकैती में कमी
गंभीर अपराधों पर लगाम: राज्य पुलिस के लिए एक और बड़ी उपलब्धि गंभीर अपराधों पर नियंत्रण पाना रहा है। हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। राज्यभर में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अपराधियों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों का असर धरातल पर साफ नजर आ रहा है।
स्मार्ट पुलिसिंग में उत्तराखंड देशभर में टॉप पर
स्मार्ट पुलिसिंग के मामले में उत्तराखंड देश में टॉप पर है। राज्य ने डिजिटल डाटा प्रबंधन और ‘वन डाटा वन एंट्री’ को लागू करने के मामले में पूरे देश में सर्वाधिक 93.46 का स्कोर हासिल किया है। उत्तराखंड ने सीसीटीएनएस और इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के क्रियान्वयन में आगे चल रहे हरियाणा और असम को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के साथ ही अपराधियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने की वजह से मिली है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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