
दो सौ से अधिक वीर नारियों और आंदोलनकारियों का सम्मान
उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह नैनीताल में मनाया गया, जहाँ 200 से अधिक आंदोलनकारियों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। विधायक सरिता आर्या और अन्य ने कार्यक्रम की शुरुआत की। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और शहीदों की प्रदर्शनी लगाई गई। आंदोलनकारियों ने संघर्ष की कहानियाँ साझा की।
नैनीताल, वरिष्ठ संवाददाता। उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर शनिवार को नैनीताल कलेक्ट्रेट समेत तहसीलों में समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें करीब 200 से अधिक राज्य आंदोलनकारियों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। कई आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को बयां किया। नैनीताल कलेक्ट्रेट में मुख्य अतिथि विधायक नैनीताल सरिता आर्या, विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा, पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, एडीएम शैलेंद्र सिंह नेगी आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने उत्तराखंड के सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए पारंपरिक लोक गीत, लोकनृत्य एवं वाद्य यंत्रों पर आधारित प्रस्तुतियां दी।
सूचना विभाग की ओर से उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वीर शहीदों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर वीर शहीदों को पुष्प अर्पित किए। यहां एसडीएम नवाजिश खलीक, एसडीएम कैंची धाम मोनिका, तहसीलदार अक्षय भट्ट आदि रहे। इधर, तहसील धारी, खनस्यूं, कैंची धाम और बेतालघाट क्षेत्र में भी सम्मान समारोह आयोजित किया गया। धारा 144 लागू ,थी हम लोंगों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर संघर्ष को आगे पहुंचाया। एक सिपाही ने बंदूक के बट से मेरे सिर पर हमला किया था। फिर भी हमारे हौसले नहीं डिगे। राज्य आंदोलन में हमने काफी संघर्ष किया था और अब भी सपनों का उत्तराखंड बनाने को संघर्षरत हैं। हमारे सपनों के उत्तराखंड में गैरसैंण राजधानी भी शामिल थी, जो हमें अब तक नहीं मिली। - मुन्नी तिवारी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी नैनीताल उत्तराखंड राज्य बनाने को कई लोगों ने अपनी शहादत दी। किसी ने पति, किसी ने बेटा तो किसी ने कोई अपना परिजन खोया। इस संघर्ष की गाथा की जानकारी युवा पीढ़ी को होनी जरूरी है। राज्य में आज भी कई राज्य आंदोलनकारी ऐसे हैं, जिन्हें कोई मदद या आर्थिक सहायता नहीं मिलती है। उनके बारे हमें सोचने की जरूरत है। साथ ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी भी घोषित किया जाना चाहिए। - सावित्री कैड़ा जंतवाल, राज्य आंदोलनकारी नैनीताल

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