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उत्तराखंड के ग्लेशियर पर दिलाया वित्त आयोग का ध्यान

प्रदेश सरकार ने पहली बार केंद्रीय वित्त आयोग के सामने ग्रीन बोनस की मांग को प्रमुखता से रखा है। सरकार ने प्रदेश के वन क्षेत्रों के साथ ही ग्लेशियरों की ओर भी आयोग का ध्यान दिलाया है। आयोग को भेजे गए ड्राफ्ट को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले वित्त सलाहार रहे पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे ने बुधवार को हिन्दुस्तान से भेंट में इसकी पुष्टि की। पांडे ने बताया कि वन क्षेत्र जहां कार्बन उर्त्सन में कमी के साथ ही इको सिस्टम को सही बनाए रखते हैं वहीं ग्लेशियर देश के बडे़ भू भाग को पानी पहुंचाते हैं। वन संपदा के एवज में 7 हजार करोड़ रुपये ग्रीन बोनस की मांग की गई है। ऐसे में उत्तराखंड को ग्लेशियरों के लिए अतिरिक्त मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में लगभग 1400 हिमनद हैं। जहां से गंगा-यमुना जैसी सदा नीरा नदियां निकलती हैं। उन्होंने कहा कि गंगोत्री ग्लेशियर का दायर 75 किमी है। उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में पांच किलोमीटर से लेकर 75 किलोमीटर आकार के करीब 162 ग्लेशियर हैं। पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे ने कहा है कि प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए नगर निकायों को अतिरिक्त आर्थिक मदद की जरूरत है।

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