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नैनीताल

हिमालय की संस्कृति पर आधारित लोक नृत्य और लोकगीत किए प्रस्तुत

हिन्दुस्तान टीम,नैनीतालPublished By: Newswrap
Sun, 01 Aug 2021 08:50 PM
हिमालय की संस्कृति पर आधारित लोक नृत्य और लोकगीत किए प्रस्तुत

नैनीताल। संवाददाता।

हिमालय की संस्कृति विरासत के संरक्षण एवं विकास पर आधारित जौनसार का पारंपरिक शायना (हारूल) लोकनृत्य शायना (हारूल) लोकनृत्य संस्कृति के संरक्षित एवं संर्वचन के लिए समर्पित अवध फोक आर्ट्स ग्रुप (लखनऊ) को तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से नैनीताल के रामलीला ग्राउंड शेर का डांडा में जौनसार के पारंपरिक लोक कलाओं और लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन रामलीला कमेटी के सचिव पूरन चंद्र पांडे ने दीप जलाकर कार्यक्रम शुरू किया।

इस दौरान बैज लगाना, वंदना ओ नंदा सुनंदा तु दैण है जाये, लोकगीत, आज कुछे मैत जा, लोकनृत्य (जौनसारी) निलिमा किलमा निलिमा पाकी जोल, गीत- पहाड़ों को ठंडो पाणी, लोकनृत्य- काकड़ खै जाली चिरा, गीत (अजय कुमार) - उड़ान्दे, भंवरा यो उच्चि डांडियो, लोकनृत्य (गढ़वाली)- वसंत की हवा छाया कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। संचालन उमेश काण्डपाल द्वारा किया गया। संस्था के अध्यक्ष आशीष जैसवाल ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों का स्वागत प्रतीक चिह्न देकर किया। कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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