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27 मई, 2020|2:29|IST

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महंगाई भत्ते के साथ न्यूनतम वेतन देने के एकलपीठ का आदेश निरस्त

हाईकोर्ट की संयुक्त खंडपीठ ने वन विभाग में समस्त दैनिक वेतन भोगी वन श्रमिकों को महंगाई भत्ते के साथ न्यूनतम वेतन देने के एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही प्रदेश सरकार की विशेष अपीलों को निस्तारित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत के इस फैसले से वन विभाग में 1984 के बाद लगे लगभग एक हजार पांच सौ से अधिक दैनिक वेतन श्रमिकों पर असर होगा।

दरअसल उत्तरांचल वन श्रमिक संघ ने 2015 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2003 में वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता देने के आदेश दिए थे। इस मामले में कुमाऊं वन श्रमिक संघ अल्मोड़ा के बैनर तले याचिका दायर की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश का पालन करते हुए सरकार केवल कुमाऊं वन श्रमिक संघ अल्मोड़ा के जुड़े वन श्रमिकों को इसका लाभ दे रही है। सरकार का यह रवैया पक्षपात पूर्ण है और न्याय संगत भी नहीं है। इस पर एकलपीठ ने सरकार को 23 मार्च 2017 को विभाग में कार्यरत इस संवर्ग के सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के साथ महंगाई भत्ता देने के आदेश दिए। इधर सरकार ने 50 से अधिक मामलों में स्पेशल अपील दायर की थी। इस पर हुई बहस में सरकार की ओर से कई दलीलें दी गई। इसमें मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के 2002 में दिए गए पुत्ती लाल बनाम यूपी सरकार, जगजीत सिंह बनाम पंजाब सरकार और 2006 के उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार के आधार पर एकलपीठ के आदेश को गलत ठहराया था। इसके बाद संयुक्त खंडपीठ ने एकलपीठ के 23 मार्च 17 के आदेश को निरस्त करते हुए सभी लंबित याचिकाओें को निस्तारित घोषित कर दिया है।

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  • Web Title:order to give dearness allowance with minimum wages canceled