
मां नंदा-सुनंदा के आगे-आगे चला लखिया भूत
संक्षेप: फोटो नैनीताल, संवाददाता। नंदा महोत्सव में जिला पर्यटन विकास विभाग की ओर से लखिया भूत की नाट्य प्रस्तुति कराई गई l नंदा-सुनंदा डोला भ्रमण के दौरान ल
नैनीताल, संवाददाता। नंदा महोत्सव में जिला पर्यटन विकास विभाग की ओर से लखिया भूत की नाट्य प्रस्तुति कराई गई l नंदा-सुनंदा डोला भ्रमण के दौरान लोग लखिया भूत और गैल्या बल्द की कहानी देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। नन्दा महोत्सव के दौरान पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध लखिया भूत की कहानी का नाट्य प्रस्तुतीकरण किया गया l नाटक का नेतृत्व कर रहे कैलाश जोशी ने बताया की नेपाल के राजा की ओर से पिथौरागढ़ के मैहर लोगों को नेपाल जाने पर लखिया भूत उपहार में दिया गया l राजा की ओर से मैहर वंश को देने के लिए नकली लखिया भूत की पोषाक बनाई गई थी, लेकिन गलती से राजा ने उन्हें असली पोषाक दे दी।
जिससे उनका देव लखिया भूत पिथौरागढ़ आ गया। जिसकी पिथौरागढ़ के कुमौड़ में स्थापना की गई। जिसके बाद लखिया भूत वापस नेपाल जाने लगा था। उसे पिथौरागढ़ में रोकने के लिए गणों ने जंजीरों से जकड़ा, ताकि न जा सके। बताया कि पिथौरागढ़ में गौरा-महेश उत्सव के दौरान निकाली जाने वाली हिरण गैल्या बल्द, लाटा-लाटी और लखिया भूत के नाटक की प्रस्तुति भी नैनीताल में दी गई l लखिया भूत को देवी का रक्षक माना जाता है, जिसके लिए उसे डोले के आगे भ्रमण कराया जाता है। नैनीताल में केवल लखिया भूत का नाट्य मंचन किया जा रहा है, असली लखिया भूत की यात्रा पिथौरागढ़ में निकाली जा रही है। यहां सुमित कोहली, राकेश, रमेश लाल, दिगंबर दीप, धीरज कुमार, निर्मल भंडारी आदि मौजूद रहे l

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