कुमाऊं विवि के शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता परखने को बनाई समिति
दिल्ली विवि समेत देश के प्रतिष्ठित विवि के शिक्षाविद समिति में शामिल प्रकाशित लेख वैज्ञानिक,

नैनीताल, संवाददाता। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता तय करने की दिशा में अहम पहल की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से केयर सूची को समाप्त किए जाने के बाद अब विश्वविद्यालयों पर शोध गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई है। इसी संबंध में कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल ने कुलपति प्रो. दीवान एस रावत के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति तय करेगी कि किन शोध पत्रिकाओं को प्रत्यक्ष नियुक्तियों एवं कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के अंतर्गत पदोन्नति के लिए मान्यता दी जाए। कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक साख और शोध संस्कृति को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि केवल उच्च गुणवत्ता वाले, नैतिक और विषय-संगत शोध प्रकाशनों को ही मान्यता दी जाए।
समिति में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों जैसे भूगोल, वनस्पति विज्ञान, भूविज्ञान, हिन्दी, प्रबंधन, इतिहास, रसायन, वाणिज्य, भौतिकी और राजनीति शास्त्र के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हैं। साथ ही देश के अन्य विश्वविद्यालयों एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को भी समिति में शामिल किया गया है। यह समिति उन शोध पत्रिकाओं की पहचान करेगी जिनमें प्रकाशित लेख वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया से गुजरे हों। इसके आधार पर ही विश्वविद्यालय पदोन्नति के लिए शोध कार्यों की मान्यता तय करेगा। प्रो. रावत ने स्पष्ट किया कि केयर सूची की समाप्ति के बाद यह कदम अत्यंत आवश्यक हो गया था।
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