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सौतेली नाबालिग पुत्री से दुराचार मामले में आरोपी पिता बरी

सौतेली नाबालिग पुत्री से दुराचार मामले में आरोपी पिता बरी

संक्षेप:

फैसला सौतेली नाबालिग पुत्री से दुराचार मामले में आरोपी पिता बरी सौतेली नाबालिग पुत्री से दुराचार मामले में आरोपी पिता बरीसौतेली नाबालिग पुत्री से दुरा

Dec 08, 2025 06:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नैनीताल
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नैनीताल, संवाददाता। हाईकोर्ट ने नाबालिग सौतेली पुत्री से दुराचार के आरोपी पिता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने रुद्रपुर की पॉक्सो फास्ट ट्रैक कोर्ट की ओर से 5 दिसंबर 2025 को सुनाई गई 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा को रद कर दिया। आरोपी के खिलाफ पीड़िता की ओर से 17 अप्रैल 2019 को किच्छा थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के दो प्रमुख गवाह पीड़िता और उसकी मां अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसने पुलिस के डर से धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान दिया था और वह स्वैच्छिक नहीं था।

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वहीं, उसकी मां ने किसी भी यौन उत्पीड़न की घटना की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों को भी अभियोजन पक्ष के दावों के विपरीत माना। मेडिकल रिपोर्ट हाल में हुए यौन संबंध की पुष्टि नहीं करती थी और डीएनए रिपोर्ट को भी निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सका। अदालत ने अख्तर अली बनाम उत्तराखंड राज्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया। चूंकि मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के शरद बिरधीचंद शारदा बनाम महाराष्ट्र राज्य (1984) मामले में स्थापित पांच सुनहरे सिद्धांतों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में साक्ष्यों की श्रृंखला पूर्ण नहीं थी और आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं हो पाया। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।