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हाईकोर्ट ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली के क्रियान्वयन पर लगाई रोक

हाईकोर्ट ने प्रदेश में 2013 की नियमितीकरण नियमावली के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार के विभागों के साथ ही निगमों, परिषदों तथा सरकारी और अर्ध सरकारी विभागों में यह रोक लागू रहेगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी। नैनीताल जिले के ग्राम सौड़बगड़ निवासी नरेंद्र सिंह बिष्ट और अन्य ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि वह वह इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होल्डर हैं और सरकारी विभागों में जेई पद की अर्हता रखते हैं। लेकिन सरकार नियुक्ति प्रक्रिया नहीं कर रही है। इसमें सरकार की 2013 की नियमतीकरण नियमावली मुख्य रूप से बाधक है। इस नियमावली से बगैर स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के विभागों में पिछले दरवाजे से नियुक्त कार्मिकों को नियमित कर दिया जा रहा है। इसके चलते पद रिक्त नहीं हो रहे हैं। कहा है कि 2013 में बनी नियमितीकरण नियमावली सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी व एमएल केशरी के मामले में दिए गए एतिहासिक निर्णय के खिलाफ बनी है। याचिका में इस नियमावली को भी चुनौती दी गई है। संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद इसके क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 10 दिन के बाद होगी। इधर प्रदेश सरकार ने सन् 2016 में इस नियमावली में संसोधन किया था। इस संसोधन को हिमांशु जोशी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन इस याचिका को कोर्ट ने पूर्व में ही निरस्त कर दिया था।

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  • Web Title:Hc restrains implementation of the 2013 regularization rules