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प्रदेश में मद्य निषेध के लिए चरणबद्ध कदम उठाए सरकार: हाईकोर्ट

प्रदेश में मद्य निषेध के लिए चरणबद्ध कदम उठाए सरकार: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश में मद्य निषेध के लिए चरणबद्ध कदम उठाने को कहा है। अदालत ने आबकारी अधिनयम 37 ए का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए छह माह के भीतर नीति बनाने को कहा है। वहीं 2019 में प्रदेश में बनी आबकारी नीति अथवा नियमावली के 21 साल से कम आयुवाले व्यक्ति को शराब बेचने पर प्रतिबंध को कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस पर नजर रखने के लिए शराब की दुकानों और बार में आईपी पते लिखे सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिनियम में मद्यनिषेध को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है लेकिन सरकार लगातार शराब की दुकानों को बढ़ाते जा रही है । मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

बागेश्वर जिले के गरुड़ निवासी अधिवक्ता डीके जोशी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि प्रदेश में सरकारी संरक्षण में बेची जा रही शराब से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कई घर उजड़ गए हैं। इससे होने वाली बीमारी और दुर्घटना से हताहत होने वालों के लिए कोई मुआवजे की व्यवस्था नहीं की गई है। प्रदेश में लागू आबकारी अधिनियम 1910 में उप्र सरकार ने 1978 में 37 ए के माध्यम से संशोधन किया था लेकिन उत्तराखंड सरकार इस संशोधन का पालन नहीं कर रही है। 19 साल बीतने के बाद भी इस प्रावधान का पालन कर मद्य निषेध को लेकर कोई कवायद नहीं की जा रही है। वहीं साल दर साल राज्य सरकार राजस्व के नाम पर दुकानों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज कर रही है। यहीं 2019 की आबकारी नीति में डीएम के लिए विशेष निर्देश हैं कि जिले का कोई भी क्षेत्र शराब की दुकान से वंचित नहीं रहे। वहीं 21 साल से कम के व्यक्ति को शराब नहीं बेचने के प्रावधान की भी उपेक्षा की जा रही है। याचिका में पहाड़ी प्रदेश में बर्बादी का कारण बताते हुए यहां शराब पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पारित करने की मांग की गई थी। इधर राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। इसमें कहा गया कि वर्ष 2002 में आबकारी पालिसी में कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। प्रदेश के धार्मिक स्थल हरिद्वार, ऋषिकेश, चारधाम, पूर्णागिरी व पिरान कलियर क्षेत्र में शराब को प्रतिबंधित किया गया है। स्कूल कॉलेज और मंदिर मस्जिद से भी दूरी बनाए रखी गई है। इसको देखते हुए याचिका विचारणीय नहीं है। याची की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी नौटियाल ने बताया कि संयुक्त खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए सरकार को 37 ए के प्रावधान लागू करने के लिए नीति बनाने को छह माह का समय दिया है। इसके बाद इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जगाने वाला ऐतिहासिक फैसला दिया है। प्रदेश में बढ़ती शराब की प्रवृत्ति पर इससे अंकुश लगेगा।

डीके जोशी याची अधिवक्ता

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