खाकी से खेती तक..जैविक खेती से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने गोपाल

हिन्दुस्तान, नैनीताल
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देश और समाज की सेवा करने का जज्बा यदि मन में हो तो उसके लिए न उम्र मायने रखती है और न कोई वर्दी। इस बात को भवाली गांव निवासी राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा

खाकी से खेती तक..जैविक खेती से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने गोपाल

भवाली, संवाददाता। देश और समाज की सेवा करने का जज्बा यदि मन में हो तो उसके लिए न उम्र मायने रखती है और न कोई वर्दी। इस बात को भवाली गांव निवासी राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा पदक विजेता गोपाल बिष्ट ने सच साबित कर दिखाया है। अग्निशमन विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद गोपाल बिष्ट ने अपनी मिट्टी और गांव से जुड़कर समाज को नई दिशा देने का काम शुरू किया। वे जैविक खेती के माध्यम से न सिर्फ स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी प्रकृति और पारंपरिक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।गोपाल

बिष्ट भवाली और भीमताल क्षेत्र में पूरी तरह कैमिकल मुक्त और पारंपरिक तरीकों से फल, सब्जियां और अन्य फसलें उगा रहे हैं। उनका मानना है कि रासायनिक खाद और दवाइयों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती को अपनाया और अब स्थानीय लोगों को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं। अग्निशमन सेवा में उनका कार्यकाल उपलब्धियों और कर्तव्यनिष्ठा से भरा रहा। संकट के समय लोगों की जान-माल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गोपाल बिष्ट को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2015 में उन्हें उत्तराखंड अग्निशमन सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड द्वारा उत्कृष्ट अग्निशमन सेवाओं के लिए प्रशंसा एवं कांस्य डिस्क सम्मान प्रदान किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी गोपाल बिष्ट समाज सेवा में लगातार सक्रिय हैं। वह स्थानीय लोगों को जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं के प्रति जागरूक करते रहते हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को खेती और स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ वह यह भी बता रहे हैं कि पारंपरिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से पहाड़ की आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है।

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