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लोक नाट्य बिना औपचारिकता लोगों को भाषा और बोली में बांधने में सक्षम

लोक नाट्य बिना औपचारिकता लोगों को भाषा और बोली में बांधने में सक्षम

महादेवी वर्मा सृजनपीठ एवं केंद्रीय हिंदी निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में लोक नाट्य परंपरा और विकास विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी बुधवार को जारी रही। दूसरे दिन के मुख्य वक्ता शांति निकेतन विवि पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ प्राध्यापक डा.चक्रधर त्रिपाठी ने कहा कि लोक नाट्य की जड़ें लोक साहित्य में भी अत्यंत गहरी हैं। जो बिना किसी औपचारिक्ता के लोगों को भाषा और बोली में बांधने में सक्षम हैं। कवियत्री महादेवी वर्मा की 31वीं पुण्यतिथि पर यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर नैनीताल में आयोजित संगोष्ठी में डा.चक्रधर ने कहा कि लोक नाटकों की नैसर्गिक अभिव्यक्ति हमेशा से प्रवाहमान रही है। रंगकर्मी ध्रुव कुमार टम्टा ने कहा कि लोकनाट्य विधा लोक कथानकों, लोक विश्वासों और लोक तत्वों को समेटे है। जगदीश चंद्र जोशी ने कहा कि लोक नाट्य सामूहिक अभिव्यक्ति का साधन है। शोध छात्र नवीन जोशी ने लोक नाट्य के क्षेत्र में नैनीताल के योगदान की जानकारी दी। सत्र की अध्यक्षता डा.निर्मला ढैला बोरा ने की। संगोष्ठी को रतन सिंह किरमोलिया, डा.चंद्रभान सिंह यादव, डा.दीपा गोबाड़ी, डा.अचिता सिंह, दीपा पांडे, नवीन जोशी, अमरीन, गोविंद यादव आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर सृजनपीठ के निदेशक प्रो.देव सिंह पोखरिया, प्रो.नीरजा टंडन, जहूर आलम, डा.हरिसुमन बष्टि, प्रो.चंद्रकला रावत, डा.शशि पांडे, डा.सुनीता गुरूरानी, डा.गीता खोलिया, डा. शंभू दत्त पांडे, डा. वसुंधरा उपाध्याय, डा.प्रियंका रुबाली, डा.संतोष कुमार, डा.प्रकाश लखेड़ा, डा.प्रभा साह, डा.किरन दानू, डा.बसंती रौतेला, राजेश प्रसाद, डा.हेमा दानी, डा.रेखा साह, डा.राजीव जोशी, डा.कुंदन रावत, भावना अग्रवाल, अनीता पांडे, बहादुर कुंवर, मुक्ता सनवाल, प्रमोद रैखोला आदि मौजूद रहे। संचालन मोहन सिंह रावत ने किया।

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