
फिटनेस फीस छूट अटकी, 50 हजार वाहन सड़कों से बाहर
फिटनेस फीस छूट अटकी, 50 हजार वाहन सड़कों से बाहर - एनआईसी अपडेट में
फिटनेस फीस छूट अटकी, 50 हजार वाहन सड़कों से बाहर - एनआईसी अपडेट में देरी से खनन और परिवहन ठप - गौला-नंधौर में 5 हजार वाहन फंसे, कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें - शासनादेश के 15 दिन बाद भी एनआईसी पोर्टल पर अपडेट नहीं कारोबारी मुश्किल में : हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। उत्तराखंड में 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस फीस छूट का शासनादेश जारी होने के 15 दिन बाद भी लागू नहीं हो सका है। दिल्ली स्थित एनआईसी सॉफ्टवेयर में अपडेट न होने की वजह से प्रदेशभर के करीब 50 हजार से अधिक वाहन फिटनेस न मिलने के कारण खड़े हैं।
इससे परिवहन और खनन उद्योग दोनों पर बड़ा असर पड़ा है। हल्द्वानी की गौला और नंधौर नदी में स्थिति सबसे ज्यादा विकट है। यहां 5,000 से अधिक खनन वाहन फिटनेस न होने के कारण रिलीज नहीं हो सके हैं। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि सरकार ने बढ़ी हुई फीस पर एक साल की छूट देकर राहत तो दी, लेकिन सिस्टम अपडेट न होने से पूरा उद्योग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। निजी बस ऑपरेटर एचबी तिवारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया है कि छूट का लाभ तत्काल प्रभाव से लागू कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 21 नवंबर को जारी हुआ था छूट का आदेश 21 नवंबर 2025 को जारी शासनादेश के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा संशोधित की गई फिटनेस फीस दरों को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया था कि पुराने शुल्क ही प्रभावी रहेंगे। लेकिन एनआईसी पोर्टल पर आदेश अपडेट न होने से किसी भी कमर्शियल वाहन की ऑनलाइन फिटनेस फीस में छूट लागू नहीं हो पाई है। परिवहन विभाग का कहना है कि तकनीकी अपडेट के बिना आदेश जमीन पर लागू नहीं हो सकता। छूट से 1,100 से 15,600 रुपये तक राहत केंद्र सरकार की संशोधित फीस दरों के अनुसार 15 वर्ष पुराने बस, डंपर, टैक्सी और अन्य वाहनों की फिटनेस फीस में भारी बढ़ोतरी की गई थी। स्थानीय बस ऑपरेटरों और खनन वाहनों के मालिकों की मांग पर प्रदेश सरकार ने लगातार दूसरे वर्ष बढ़ी हुई दरों से छूट दी है। इससे वाहन स्वामियों को प्रति वाहन 1,100 रुपये से 15,600 रुपये तक का लाभ मिलना है। इस संबंध में एनआईसी मुख्यालय दिल्ली को पत्र भेज दिया गया है। जल्द ही समस्या का निस्तारण कर लिया जाएगा। दून परिवहन मुख्यालय देहरादून की टीम एनआईसी से लगातार संपर्क में है। — एस.के. सिंह, अपर परिवहन आयुक्त, देहरादून

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