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पलायन से संस्कृति के अस्तित्व पर खतरा : डॉ. नीलम

कुविवि के हरमिटेज भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज एंड डेवलपमेंट रिसर्च की ओर से एनसीआरआई हैदराबाद के सहयोग से आयोजित कार्यशाला शुक्रवार को भी जारी रही। कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने विचार रखे।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस मुंबई से पहुंची डॉ. नीलम यादव ने क्षेत्रीय संसाधनों और पर्यावरण के आधार पर उद्यम लगाने समेत अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा देश की आत्मा गांवों में निवास करती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि गांव से लगातार शहरों की ओर पलायन हो रहा है। गांव की संस्कृति भी लगातार खत्म हो रही है। उत्तराखंड के युवा उद्यमी गगन आनंद ने कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए। कहा वैश्वीकरण के इस विकास में सबसे अधिक नुकसान गांव की खेती को हुआ है। आजादी के इतने साल बाद भी हम खेती को एक सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में स्थापित नहीं कर पाए। आयोजक प्रो. अतुल जोशी ने अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया। इस मौके पर डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. एसडी तिवारी, डॉ. सारिका जोशी, वैशाली बिष्ट, केके पांडे, चमन कुमार, आस्था अधिकारी, श्रद्धा शर्मा मौजूद रहीं।

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