कौन हैं अनुपमा चौधरी, केदार घाटी में डगमगाए हेलीकॉप्टर को खेत में उतारा; 6 जानें बचाई
पायलट अनुपमा को 15 साल में 1800 से अधिक घंटे उड़ान का अनुभव है। उन्होंने केदार घाटी में हवा में डगमगाए हेलीकॉप्टर को खेत में उतारा और दिल्ली के 6 यात्रियों की जान बचाई।

बदरीनाथ से लौट रहे दिल्ली के छह यात्रियों को लेकर आ रहे हेलीकॉप्टर के साथ बुधवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। हवा और अधिक प्रेशर के कारण टिहरी के जौनपुर में नवागांव-सत्यों के पास खेतों में हेलीकॉप्टर को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। इस दौरान हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा हाईटेंशन लाइन से टकराने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, पायलट अनुपमा चौधरी की सतर्कता से किसी यात्री को खरोंच भी नहीं आई।
बुधवार सुबह करीब 10 बजे बदरीनाथ से लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का एक चार्टर हेलीकॉप्टर बेल-407 जौनपुर ब्लॉक में चम्बा-आराकोट क्षेत्र के ऊपर उड़ रहा था। एडीएम शैलेन्द्र सिंह नेगी के मुताबिक हवा व अधिक प्रेशर से हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगड़ने लगा।
पायलट अनुपमा ने दिखाई हिम्मत
पायलट अनुपमा चौधरी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए हेलीकॉप्टर को सत्यों-सकलाना क्षेत्र के खेतों में उतार दिया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर में पायलट अनुपमा चौधरी के अलावा पंजाबी बाग दिल्ली के यात्री साहिल सूरी, राज सूरी, भूमि सूरी, पार्थ, हिमांशी पटेल व निवका मौजूद थे। घटनास्थल सड़क मार्ग से करीब 500 मीटर दूर था। बाद में प्रशासन ने सभी यात्रियों को टैक्सी से देहरादून भेजा।
पायलट की जुबानी- क्या हुआ
घाटी में हवा के दबाव के कारण हेलीकॉप्टर बहुत तेजी से नीचे की ओर जा रहा था। मैंने बहुत कोशिश की कि हेलीकॉप्टर को ऊपर की ओर ले जाया जाए लेकिन हवा का दबाव बहुत ज्यदा था। मैंने अपनी 15 साल की नौकरी में ऐसे अनुभव पहले भी किए हैं लेकिन बुधवार को जो यात्री मेरे साथ थे उनके लिए ये पहला खतरनाक मौका था। उन्हें हौसला देते हुए मैंने लैंडिंग का मन बनाया। कुछ मिनट हवाओं से जूझने के बाद हम सब लोग कहीं खेतों के बीच थे और मेरे साथ सफर कर रहे यात्रियों के मन में घबराहट और चेहरे पर एक सुकून था। ये कहना है बुधवार को यात्रियों को सुरक्षित बचाकर लाई पायलट अनुपमा चौधरी का।
कौन हैं अनुपमा
अनुपमा, यूपी मेरठ की रहने वाली हैं और 15 साल एयरफोर्स में नौकरी के बाद रिटायर हुई हैं। उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 18 सौ घंटे उड़ान का अनुभव है। वह बीते डेढ़ साल से ट्रांस भारत एविएशन कंपनी से जुड़ी हैं और बदरी-केदारनाथ वैली में पिछले तीन सीजन से अपनी सेवाएं दे रही हैं।
15 साल का अनुभव
हिन्दुस्तान से बातचीत में उन्होंने बताया कि पहाड़ों पर बदलता मौसम हमेशा उड़ानों के लिए चुनौती रहा है। बुधवार को भी ऐसी ही चुनौती से उन्हें जूझना पड़ा। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही हवाओं ने दबाव बनाना शुरू कर दिया था। हवाओं के ऊपर से नीचे की तरफ बहने के कारण चुनौती बहुत ज्यादा बढ़ गई। जब लगा कि अब इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ेगी, तब पहली चुनौती थी हेलीकॉप्टर को पहाड़ से दूर रखते हुए सुरक्षित जगह की तलाश करना, जहां आबादी न हो।
इसी दौरान उन्हें सत्यों-सकलाना क्षेत्र के खुले खेत दिखाई दिए। जहां उन्होंने सुरक्षित लैंडिंग की। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर की टेल के तारों से टकराने के बाद मशीनरी पूरी तरह काम कर रही थी, लेकिन उन्होंने कोई जोखिम लेना उचित नहीं समझा।
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