विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे जंगलों में भड़की आग बेकाबू, वायुसेना से मांगी मदद

Jan 13, 2026 07:22 am ISTGaurav Kala देहरादून/जोशीमठ
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फूलों की घाटी से सटे जंगल चार दिन से धधक रहे हैं। नाकाम वन विभाग ने अब आग बुझाने के लिए वायु सेना की मदद मांगी है। वन विभाग का कहना है कि खड़ी पहाड़ी और चट्टानों के कारण लगातार पत्थर गिर रहे हैं, जिससे पैदल पहुंच बनाना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे जंगलों में भड़की आग बेकाबू, वायुसेना से मांगी मदद

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे जंगलों में लगी आग विकराल रूप ले चुकी है। चार दिन से आग धधक रही है और अब विकराल रूप ने वन विभाग को चिंता में डाल दिया है। आग पर काबू पाने में नाकाम वन विभाग ने अब वायुसेना की मदद लेने की मांग की है। इस संबंध में जिलाधिकारी चमोली के माध्यम से आपदा प्रबंधन सचिव को पत्र भेजा गया है।

चमोली जिले में फूलों की घाटी रेंज अंतर्गत भ्यूंडार पुलना की पहाड़ियों में लगी आग चार दिन बाद भी बेकाबू बनी हुई है। दुर्गम और खड़ी चट्टानों वाले इलाके के कारण वन विभाग की टीमें अभी तक आग प्रभावित पहाड़ियों तक नहीं पहुंच पाई हैं। रेंज अधिकारी चेतन कांडपाल ने बताया कि खड़ी पहाड़ी और चट्टानों के कारण लगातार पत्थर गिर रहे हैं, जिससे पैदल पहुंच बनाना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

चार दिन से धधक रहे जंगल

उन्होंने बताया कि शाम के समय आग की तीव्रता कुछ कम हो जाती है, लेकिन सुबह होते ही तापमान बढ़ने और तेज हवा चलने से आग दोबारा भड़क उठती है। इससे आग पर नियंत्रण के प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं।

डीएफओ एसके दुबे ने बताया कि गोविंद घाट के सामने भ्यूंडार पुलना की पहाड़ियों में लगी आग अब चारों दिशाओं में तेजी से फैल रही है। यह क्षेत्र अत्यंत दुर्गम है, जिससे आग बुझाने का कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन पैदल रास्तों की कठिनाई और सीमित संसाधनों के चलते अब तक सफलता नहीं मिल पाई है।

वन विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए हवाई माध्यम से पानी और अग्निशमन उपकरणों की आपूर्ति आवश्यक है। इसी को देखते हुए सरकार से हेलीकॉप्टरों की मदद लेकर वायुसेना के सहयोग से आग बुझाने का अनुरोध किया गया है।

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