अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बड़ी राहत, HC ने उठाया यह कदम

भाषा, नैनीताल, उत्तराखंड
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सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा  कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित सबूत हैं, तो उन्हें किसी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बजाय सक्षम अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।

EX BJP MLA Suresh Rathore

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में पूर्व विधायक सुरेश राठौर को गुरुवार कोबड़ी राहत दी और उनके खिलाफ दर्ज चार FIR में से दो रद्द कर दीं। जस्टिस राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने हालांकि, बाकी दो प्राथमिकी में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी। राठौर ने देहरादून और हरिद्वार जिलों में अपने खिलाफ दर्ज चार अलग-अलग प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उन्हें चुनौती दी थी।

शिकायतकर्ताओं, दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने आरोप लगाया था कि प्रसारित सामग्री जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। जिसके बाद अपने आदेश में, न्यायालय ने पाया कि बहादराबाद में दर्ज प्राथमिकी और हरिद्वार के झबरेड़ा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोप देहरादून के डालनवाला पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोप एक जैसे हैं।

इसके अलावा, अदालत ने संज्ञान में लिया कि हरिद्वार मामलों में शिकायतकर्ता वास्तविक पीड़ित नहीं थे, और चूंकि कथित पीड़ित पहले ही एक अलग प्राथमिकी दर्ज करा चुके थे, इसलिए ये मामले एक के बाद एक दर्ज की गई प्राथमिकी के समान थे । दोहरे दंड के सिद्धांत का हवाला देते हुए अदालत ने हरिद्वार की दोनों प्राथमिकी रद्द कर दीं।

हालांकि, पीठ ने आरती गौड़ द्वारा देहरादून के नेहरू कॉलोनी पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी और दुष्यंत गौतम द्वारा डालनवाला पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया इन दोनों शिकायतों में संज्ञेय अपराध प्रतीत होते हैं जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है।

अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित सबूत हैं, तो उन्हें किसी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बजाय सक्षम अधिकारियों को सौंप देना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की बजाए सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए किया जाना चाहिए ।

Sourabh Jain

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Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।

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