उम्रकैद काफी नहीं... अंकिता भंडारी मर्डर केस में दोषियों के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट जाने का फैसला

हिन्दुस्तान, कोटद्वार। आशीष बलोधी
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यह जनता की जिद थी कि उन्हें इस लड़ाई में पहली जीत मिली है। उन्होंने कहा कि अब तो यह लड़ाई और बड़ी हो गई है। अगर जनता का साथ मिला तो अपराधियों को ऐसी सजा मिले कि फिर कोई किसी बेटी से ऐसी हरकत न कर पाए।

Ankita Bhandari Murder Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता अब नैनीताल हाईकोर्ट का रुख करेंगे। सजा सुनाए जाने के बाद अंकिता की मां सोनी देवी ने कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट तो नहीं हैं, पर थोड़ी शांति जरूर मिली है। वह संतुष्ट तब होंगी, जब दोषियों को फांसी की सजा मिलेगी।

कोर्ट परिसर में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए अंकिता की मां ने कहा कि जिस तरह से अपराधियों ने उनकी बेटी के साथ बुरा किया, हमारी जिंदगी को नरक बना दिया, इसका दर्द एक मां ही समझ सकती है। बेटी को खोने का दर्द आज भी है। सोनी देवी ने कहा कि वह उत्तराखंड की जनता से हाथ जोड़कर अपील कर रही हैं कि आगे भी इस लड़ाई में उनका साथ दें।

यह जनता की जिद थी कि उन्हें इस लड़ाई में पहली जीत मिली है। उन्होंने कहा कि अब तो यह लड़ाई और बड़ी हो गई है। अगर जनता का साथ मिला तो अपराधियों को ऐसी सजा मिले कि फिर कोई किसी बेटी से ऐसी हरकत न कर पाए। ऐसा करने से पहले वो हजार बार सोचे। वे आगे की लड़ाई के लिए हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने साथ देने पर जनता का धन्यवाद भी किया।

पौड़ी के लोग भी कर रहे थे कड़ी सजा की उम्मीद

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर अदालत के फैसले पर शुक्रवार को पूरे प्रदेश की नजर थी। वहीं पौड़ी शहर से लेकर अंकिता के गांव के लोगों को भी इस फैसले को लेकर इंतजार था। शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायलय के फैसले के बाद पौड़ी में भी भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। शुक्रवार को सुबह से ही अंकिता भंड़ारी हत्याकांड के फैसले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थी।

प्रशासक ग्राम प्रधान डोभ विमल डोभाल, ग्रामीण कुलदीप बिष्ट, भुवन डोभाल पौड़ी ब्लाक के प्रशासक दीपक खुगशाल आदि ने कहा कि अदालत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। ग्रामीणों ने कहा कि हालांकि फैसला आने में करीब ढाई साल से अधिक का समय लग गया, लेकिन आरोपियों को सजा मिली और यही उम्मीद लोग कर रहे थे कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

Himanshu Kumar Lall

लेखक के बारे में

Himanshu Kumar Lall
हिमांशु कुमार लाल पत्रकारिता में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। वह अंग्रेजी और हिंदी अखबारों सहित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ‘हिन्दुस्तान’ के डिजिटल पत्रकारिता में जुड़ने से पहले वह अंग्रेजी अखबार ‘ द पायनियर’ में उत्तराखंड स्टेट इंचार्ज रह चुके हैं। दो दशकों के लंबे पत्रकारिता के सफर में उन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘ द ट्रिब्यून’ और अमर अजाला सहित दूरदर्शन में भी अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता और मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। 2005 में डिफेंस कॉरेस्पोंडेंस कोर्स कर चुके हैं। वह उत्तराखंड से जुड़ी राजनीतिक, धार्मिक, पर्यटन, सामाजिक सहित जन सरोकार से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। डिफेंस, राजनीतिक, स्वास्थ्य, पर्यटन और क्राइम से जुड़ी खबरें में उनका विशेष रुझान है। और पढ़ें

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