problem of renbasera in kotdwar - कोटद्वार में रैन बसेरा नहीं, कहां आसरा लें गरीब DA Image
19 नबम्बर, 2019|3:01|IST

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कोटद्वार में रैन बसेरा नहीं, कहां आसरा लें गरीब

कड़ाके की ठंड से परेशान गरीब तबके के बेसहारा लोगों को फुटपाथ पर सोकर ही रात बितानी पड़ रही है। रैन बसेरा न होने के कारण जिम्मेदार तंत्र ने शहर के कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की अपने फर्ज की इतिश्री कर ली है। रैन बसेरे की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन कोटद्वार नगर निगम में अभी तक रैन बसेरा नहीं बन पाया है। सोमवार की रात और मंगलवार की सुबह घने कोहरे के बाद तापमान में अचानक भारी गिरावट आ गई। ठंड से बचने के लिए संपन्न लोगों ने घरों और सरकारी कार्यालयों में हीटर लगाए हुए हैं, लेकिन सड़कों में रात काटने वाले गरीब तबके का एकमात्र सहारा अलाव ही है। गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में यूपी, झारखंड, बिहार व नेपाल से गरीब तबका रोजगार की तलाश में आता है। पूरे दिन दिहाड़ी-मजदूरी कर इन लोगों की रात रेलवे स्टेशन, व्यापारियों के बरामदे व सड़क किनारे कटती है। हैरत की बात यह है कि पिछले कई साल से यह सिलसिला जारी है, लेकिन आज तक स्थानीय प्रशासन ने इन लोगों के लिए क्षेत्र में रैन बसेरों की स्थापना करने की जहमत नहीं उठाई। रैन बसेरे के लिए केंद्र की ओर से ही धन अवमुक्त होता है, लेकिन वह तभी संभव है, जब रैन बसेरे की स्थापना को गंभीर प्रयास किए जाएं। क्षेत्र में सामुदायिक भवनों के नाम पर तो लाखों की धनराशि फूंकी गई है, लेकिन रैन बसेरा बनाने की याद किसी को नहीं आई।

इनका कहना है..

एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि नगर निगम अस्तित्व में आने के बाद इसके विधिवत गठन की तैयारियां शासन में चल रही हैं। इसके बाद रैन बसेरे के निर्माण के लिए भूमि तलाशी जाएगी।

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