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2 दिसंबर, 2020|2:08|IST

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प्रधानाचार्यों के पद खाली रहने से दिक्कत

राजकीय प्रधानाचार्य परिषद और राजकीय शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों की संघ कार्यालय में आयोजित बैठक में शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर सुधार पर विचार विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे हैं, जिसके कारण शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पूर्व में शिथिलीकरण व्यवस्था के अंतर्गत प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नतियां होती थी, लेकिन वर्तमान में व्यवस्था समाप्त किये जाने से अधिकांश विद्यालय प्रधानाचार्य विहीन हो गये हैं। साथ ही लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पदों पर भी नियुक्तियां न होने से सारी जिम्मेदारी शिक्षकों पर आ गई है और पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। सरकार को शीघ्र इस ओर ध्यान देना चाहिए। बैठक में बलबीर सिंह रावत, मनमोहन चौहान, बृजमोहन ममंगाई, राजेन्द्र भंडारी, रमेश कुकरेती, साधो सिंह, दीप चंद्र बलूनी, महेन्द्र नेगी, खेमकरण उनियाल और मोहन सिंह रावत आदि थे।