kotdar - पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर

उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ पहाड़ विरोधी मानसिकता के लोग पहाड़ी उत्पादों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किये जाने पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि सरकार श्रम संविदा सहकारी समितियों के माध्यम से कोदा, झंगोरा खरीद कर श्रम संविदा सहकारी समितियों के साथ-साथ गांव में पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देना चाह रही है, इससे आंगन बाड़ी में खाद्य माफियों के नेटवर्क पर विपरीत प्रभाव पड़ना निश्चित है। कहा कि ऐसे पहाड़ विरोधी लोग चिन्हित किये जाने चाहिए ताकि उनका सामाजिक बहिष्कार किया जा सके।देवी मंदिर स्थित लैंसडौन भवन में आयोजित बैठक में आशीष किमोठी ने कहा कि कोदा और झंगोरा की दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा मांग है और वहां साल भर यह मांग बनी रहती है, जबकि दक्षिण में साल भर मौसम गर्म रहता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में कोदा, झंगोरा खाने से कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि झंगोरे की ठंडी खीर की वर्तमान में सबसे ज्यादा मांग है और शादी-पार्टियों में भी गर्मी के मौसम में भी पहाड़ी उत्पाद बड़े चाव से बनाये और खाये जाते हैं। दक्षिण में कोदा और झंगोरे की आज भी भारी मांग है और सहकारी समितियों के पास आर्गेनिक कोदा, झंगोरा पूरी मात्रा में उपलब्ध है। महाबगढ़ श्रम संविदा सहकारी समिति जैसी अन्य समितियों को ऑर्डर दे सकता है। समिति की कोदा और झंगोरा के ऑर्डर के लिए दुबई जैसे गर्म देशों में बातचीत चल रही है। जबकि आंगनबाड़ी में गर्मी की छुट्टी के बाद कोदा, झंगोरा की खरीद होनी है। ऐसे में इनकी गर्म तासीर पर सवाल उठाना बताता है कि माफिया की असली मंशा क्या है। बैठक में आशीष किमोठी, ध्यान सिंह नेगी, मुजीब नैथानी, विश्वजीत, संजय मलासी, राजविमल, संदीप जोशी, महेश देवरानी, ऋषि, चन्द्रेश बौंठियाल, सुनील रावत, महेंद्र बिष्ट, महाराज बिष्ट, सुरेंद्र भारद्वाज आदि मौजूद थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:kotdar