नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया
संक्षेप: भारत विकास परिषद ने बद्रीनाथ मार्ग स्थित प्रेक्षागृह में सनातन संस्कृति और विज्ञान पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत ने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया। स्वामी यतीन्द्रानन्द महाराज ने परिवारों में सामंजस्य की कमी और बच्चों के व्यवहारिक विकास की आवश्यकता पर चर्चा की।
भारत विकास परिषद की ओर से मंगलवार को बद्रीनाथ मार्ग स्थित प्रेक्षागृह में सनातन संस्कृति के विभिन्न पक्षों एवं विज्ञान विषय पर विचार गोष्ठी का आfयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया। विचार गोष्ठी का आरंभ करते हुए मुख्य अतिथि महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नई पीढ़ी अपने संस्कारों को भूलती जा रही है। हमें नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार दिलाने का प्रयास करना चाहिए और यह सभी लोगों की नैतिक जिम्मेदारी भी है। मुख्य वक्ता जूना अखाड़ा के महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द महाराज ने कहा कि आजकल परिवारो में सामंजस्य की कमी होती जा रही है जिससे परिवार टूटते जा रहे है, इसको बचाने की जरूरत है ।

उन्होने कहा कि आजकल बच्चे केवल किताबी पढ़ाई पर निर्भर रहते हैं। वे व्यवहारिक व सामाजिक गतिविधियों में बिल्कुल भी समय नही देते जिस कारण उनका बौद्धिक विकास नही होता। हमें अपने बच्चो को ऐसे संस्कार देने चाहिए जिससे वे व्यवहारिक भी बने। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमन्त्री रणनीतिक सलाहकार समिति के सदस्य मनु गौड़ ने जनसंख्या पर अपने विचार व्यक्त किए। अंत में अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल ने परिषद द्वारा किए गए कार्यो के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी में परिषद अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल, सचिव प्रदीप अग्रवाल ,कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल, कार्यक्रम संयोजक मीनाक्षी शर्मा, गोपाल बंसल, राजेन्द्र जखमोला, तोताराम पांथरी, अनूप बड़थ्वाल, श्रीकृष्ण सिंघानिया और विष्णु अग्रवाल सहित परिषद के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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